डी पी रावत
अखण्ड भारत दर्पण न्यूज
विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, लेकिन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित “होम्याशक्ति 2026 मेडिकल कॉन्फ्रेंस” ने विशेष रूप से सबका ध्यान आकर्षित किया। यह एक राष्ट्रीय स्तर का भव्य सम्मेलन था, जिसमें देश के कोने-कोने से आए प्रतिष्ठित होम्योपैथिक चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस आयोजन का उद्देश्य न केवल होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देना था, बल्कि इसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आधुनिक चिकित्सा में इसकी भूमिका और भविष्य की संभावनाओं पर गंभीर विचार-विमर्श करना भी था।
यह सम्मेलन होम्योपैथी के जनक डॉ. सैमुअल हैनिमन की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जिनके सिद्धांतों ने चिकित्सा जगत में एक नई दिशा प्रदान की। उनके द्वारा प्रतिपादित “like cures like” का सिद्धांत आज भी होम्योपैथी की आधारशिला बना हुआ है। इस अवसर पर उपस्थित विशेषज्ञों ने उनके योगदान को याद करते हुए होम्योपैथी के महत्व को रेखांकित किया।
सम्मेलन की शुरुआत एक गरिमामयी उद्घाटन सत्र के साथ हुई, जिसमें आयोजकों ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इसके बाद विभिन्न तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें होम्योपैथी के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि आज के समय में, जब लोग एलोपैथिक दवाओं के साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए विकल्प तलाश रहे हैं, तब होम्योपैथी एक सुरक्षित, किफायती और प्रभावी चिकित्सा प्रणाली के रूप में तेजी से उभर रही है।
सम्मेलन के दौरान कई जटिल और दीर्घकालिक बीमारियों जैसे एलर्जी, अस्थमा, त्वचा रोग, माइग्रेन, डायबिटीज और मानसिक तनाव से जुड़ी समस्याओं के उपचार में होम्योपैथी की उपयोगिता पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सही तरीके से दी गई होम्योपैथिक दवाएं रोग के मूल कारण को समाप्त करने में सक्षम होती हैं, जिससे रोगी को स्थायी राहत मिलती है।
इस भव्य आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण क्षण वह था, जब हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. सुमित पुन्याल को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उन्हें “Shining Star of Homoeopathy” पुरस्कार से नवाजा गया, जो उनके द्वारा किए गए जनसेवा, स्वास्थ्य जागरूकता और चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों का प्रतीक है। यह सम्मान न केवल डॉ. पुन्याल के लिए, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।
डॉ. सुमित पुन्याल ने इस सम्मान को प्राप्त करने के बाद अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए बहुत ही खास है और वे इसे अपने प्रदेश और अपने मरीजों को समर्पित करते हैं। उन्होंने कहा, “यह सम्मान मेरे अकेले का नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों का है जिन्होंने मुझ पर विश्वास किया। मेरे मरीजों का भरोसा ही मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा है।”
उन्होंने आगे कहा कि होम्योपैथी एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है, जो न केवल रोगों का इलाज करती है, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का कार्य करती है। यह शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करती है, जिससे व्यक्ति स्वस्थ और संतुलित जीवन जी सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि होम्योपैथी में रोग के लक्षणों को दबाने के बजाय उसके मूल कारण को समाप्त करने पर ध्यान दिया जाता है, जिससे रोग की पुनरावृत्ति की संभावना कम हो जाती है।
डॉ. पुन्याल ने अपने भविष्य के लक्ष्यों के बारे में बात करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य होम्योपैथी को हर व्यक्ति की पहली पसंद बनाना है। वे चाहते हैं कि समाज के हर वर्ग तक इस चिकित्सा पद्धति की पहुंच हो, ताकि लोग सुरक्षित और प्रभावी उपचार का लाभ उठा सकें। इसके लिए वे लगातार जागरूकता अभियान चलाने और लोगों को होम्योपैथी के प्रति जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं।
सम्मेलन में उपस्थित अन्य विशेषज्ञों ने भी होम्योपैथी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस पद्धति को और अधिक वैज्ञानिक आधार देने की आवश्यकता है। इसके लिए रिसर्च, क्लीनिकल ट्रायल और आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि इसकी प्रभावशीलता को प्रमाणित किया जा सके और इसे मुख्यधारा की चिकित्सा प्रणाली में और अधिक मजबूती के साथ शामिल किया जा सके।
कार्यक्रम के आयोजक डॉ. उमंग खन्ना और होम्याशक्ति फाउंडेशन की टीम ने इस सम्मेलन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने देशभर के चिकित्सकों को एक मंच प्रदान किया, जहां वे अपने अनुभव साझा कर सकें और एक-दूसरे से सीख सकें। इस प्रकार के आयोजन न केवल ज्ञान-विनिमय को बढ़ावा देते हैं, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में नवाचार और सहयोग को भी प्रोत्साहित करते हैं।
सम्मेलन के समापन सत्र में यह संदेश दिया गया कि होम्योपैथी के प्रचार-प्रसार और विकास के लिए इस प्रकार के आयोजनों की निरंतर आवश्यकता है। यदि सरकार, चिकित्सा संस्थान और समाज मिलकर इस दिशा में प्रयास करें, तो होम्योपैथी को स्वास्थ्य सेवाओं का एक प्रमुख स्तंभ बनाया जा सकता है।
अंततः, लखनऊ में आयोजित यह राष्ट्रीय सम्मेलन न केवल होम्योपैथी के महत्व को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भारत में इस चिकित्सा पद्धति के प्रति लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। डॉ. सुमित पुन्याल को मिला सम्मान इस बात का प्रमाण है कि समर्पण, मेहनत और सेवा भाव के साथ कार्य करने पर सफलता अवश्य मिलती है।
यह आयोजन एक प्रेरणा है — न केवल चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए, बल्कि उन सभी के लिए जो समाज की सेवा में अपना योगदान देना चाहते हैं। होम्योपैथी के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा को सरल, सुलभ और सुरक्षित बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।



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