“चपोहल में भक्ति का महासंगम: 4 अप्रैल से गूंजेगी श्रीराम कथा, नौ दिन तक बरसेगी आस्था की अमृत वर्षा” - अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़

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    Monday, March 30, 2026

    “चपोहल में भक्ति का महासंगम: 4 अप्रैल से गूंजेगी श्रीराम कथा, नौ दिन तक बरसेगी आस्था की अमृत वर्षा”

     


    🔴 प्रख्यात कथा व्यास डॉ. दया नंद गौतम करेंगे कथा वाचन, कलश यात्रा से होगा भव्य शुभारंभ—पूरे दलाश क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल


    📍 आनी, 30 मार्च | 

    डी० पी० रावत: विशेष रिपोर्ट।

    अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़ डेस्क


    हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के आनी उपमंडल के अंतर्गत आने वाले दलाश क्षेत्र का ग्राम चपोहल इन दिनों एक बड़े धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। 4 अप्रैल से 12 अप्रैल 2026 तक यहां स्थित श्री महावीर मंदिर चपोहल में भव्य “श्रीराम चरित मानस कथा ज्ञान यज्ञ” का आयोजन किया जा रहा है, जो पूरे क्षेत्र को भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंग देगा।


    इस आयोजन को लेकर न केवल चपोहल, बल्कि आसपास के गांव—रिवाड़ी, गुहान, रौं और दलाश—में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन आध्यात्मिक उन्नति, सांस्कृतिक एकता और सामाजिक समरसता का एक अद्भुत अवसर बनकर सामने आ रहा है।

    🕉️ कलश यात्रा के साथ होगा शुभारंभ, गूंजेगा “जय श्री राम” का उद्घोष


    आयोजन समिति के अनुसार, इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ 4 अप्रैल को प्रातः 9 बजे विशाल कलश यात्रा के साथ किया जाएगा। यह यात्रा पूरे गांव में निकाली जाएगी, जिसमें सैकड़ों महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर भाग लेंगी।


    ढोल-नगाड़ों, भजन-कीर्तन और जयघोषों के बीच यह यात्रा पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना देगी। यह नजारा न केवल धार्मिक आस्था को प्रकट करेगा, बल्कि हिमाचली संस्कृति की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करेगा।

    📖 प्रख्यात कथा व्यास डॉ. दया नंद गौतम करेंगे राम कथा का वाचन


    इस नौ दिवसीय कथा ज्ञान यज्ञ में प्रसिद्ध कथा व्यास डॉ. दया नंद गौतम अपने मुखारविंद से श्रीराम चरित मानस की दिव्य कथा का वाचन करेंगे। वे अपनी ओजस्वी वाणी, गूढ़ व्याख्या और भावपूर्ण शैली के लिए जाने जाते हैं।


    उनकी कथा शैली केवल धार्मिक नहीं, बल्कि जीवन के व्यावहारिक पहलुओं को भी छूती है। रामायण के माध्यम से वे मानव जीवन के आदर्श, मर्यादा, धर्म और कर्तव्य की गहराई को सरल शब्दों में प्रस्तुत करते हैं, जिससे हर आयु वर्ग का श्रोता जुड़ पाता है।

    दैनिक कार्यक्रम: अनुशासन और भक्ति का सुंदर समन्वय


    आयोजन को सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए प्रतिदिन के कार्यक्रम की स्पष्ट रूपरेखा तय की गई है:


    मंडप पूजन: प्रातः 9:00 बजे से 11:00 बजे तक


    राम कथा वाचन: दोपहर 1:00 बजे से सायं 4:00 बजे तक


    भंडारा: कथा के पश्चात प्रतिदिन विशाल भंडारा



    हर दिन की शुरुआत धार्मिक विधि-विधान से होगी, जिसके बाद कथा का आयोजन किया जाएगा। कथा के अंत में भंडारे के माध्यम से सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा।

    🍛 भंडारा: सेवा और समर्पण का प्रतीक


    भंडारे का आयोजन इस धार्मिक कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इसमें प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करेंगे। यह न केवल सेवा भावना का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक समानता और एकता का संदेश भी देता है।


    ग्रामवासी स्वयंसेवक के रूप में इस भंडारे में सेवा देंगे, जिससे सामूहिक सहभागिता और भाईचारे की भावना को बल मिलेगा।

    🤝 ग्रामवासियों का सामूहिक सहयोग बना आयोजन की ताकत


    इस विशाल आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता है—स्थानीय लोगों की भागीदारी। चपोहल सहित आसपास के गांवों के लोग तन-मन-धन से इस आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं।


    गांव के युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी अपने-अपने स्तर पर योगदान दे रहे हैं। कोई सजावट में लगा है, कोई व्यवस्था संभाल रहा है, तो कोई भंडारे की तैयारी में व्यस्त है। यह आयोजन एक उदाहरण बन रहा है कि कैसे सामूहिक प्रयास से बड़े कार्य सफल होते हैं।

    🌄 धर्म के साथ पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा


    ऐसे धार्मिक आयोजनों से न केवल आध्यात्मिक वातावरण बनता है, बल्कि स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है। आसपास के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु यहां की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और परंपराओं को भी करीब से देख पाएंगे।


    यह आयोजन दलाश क्षेत्र को एक धार्मिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।


    🧠 आध्यात्मिक जागरण का माध्यम बनेगी राम कथा


    राम कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह एक आध्यात्मिक जागरण का माध्यम भी है। वर्तमान समय में जहां जीवन भागदौड़ और तनाव से भरा हुआ है, वहां ऐसे आयोजन मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं।


    रामायण के माध्यम से मिलने वाले संदेश—सत्य, धर्म, त्याग और मर्यादा—आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने प्राचीन काल में थे।


    📢 श्रद्धालुओं से अपील: सपरिवार बनें भागीदार


    आयोजन समिति ने क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस पावन अवसर पर सपरिवार उपस्थित होकर कथा श्रवण करें और पुण्य के भागी बनें।


    समिति का कहना है कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और संस्कारों को मजबूत करने का एक माध्यम है।

    🔚 निष्कर्ष: चपोहल बनेगा भक्ति और आस्था का केंद्र


    4 अप्रैल से शुरू होने वाला यह नौ दिवसीय श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ निश्चित रूप से चपोहल को भक्ति और आध्यात्म का केंद्र बना देगा। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत प्रभावशाली साबित होगा।


    जब पूरे क्षेत्र में “जय श्री राम” के जयघोष गूंजेंगे, तो यह केवल एक धार्मिक ध्वनि नहीं होगी, बल्कि यह आस्था, एकता और भारतीय संस्कृति की अमर गूंज होगी।

    ✍️ (ABD न्यूज़ – अखण्ड भारत दर्पण)

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