🟨 देव मिलन, भजनों और भंडारे के बीच दिखी आस्था और सामाजिक एकता की अनोखी तस्वीर
🟨भंडारे में जातीय प्रथा पर अटूट प्रहार: सभी जातियों के लोगों ने एक साथ एक भोजन ग्रहण किया।
आनी (कुल्लू), 27 मार्च |
डी० पी० रावत : विशेष रिपोर्ट
अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़ |
हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू के आनी उपमंडल के जाबण क्षेत्र के देहुरी इन दिनों भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा के अद्भुत संगम के साक्षी बन रहे हैं। देहुरी स्थित माता पछला मंदिर की में आयोजित नौ दिवसीय देवी भागवत पुराण कथा ने पूरे क्षेत्र को मानो “मिनी कुंभ” में परिवर्तित कर दिया है। यहां उमड़ रहा जनसैलाब केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक भी प्रस्तुत कर रहा है।
🔶 देवी महिमा के प्रवचनों से भावविभोर हुए श्रद्धालु
कथा के आठवें दिन व्यासपीठ से कथावाचक आचार्य शशांक कृष्ण कौशल ने देवी महिमा का विस्तृत और प्रभावशाली वर्णन करते हुए कहा कि “माता की भक्ति ही जीवन के समस्त दुखों का निवारण करती है।” उनके ओजस्वी प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से सराबोर कर दिया।
उन्होंने बताया कि जब मनुष्य सच्चे मन और श्रद्धा से माता का स्मरण करता है, तो उसके जीवन के कष्ट स्वतः समाप्त हो जाते हैं और उसे मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। उनके शब्दों में धर्म केवल पूजा नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक सशक्त कला है।
🎶 भजनों की मधुर धुनों पर झूम उठा मंदिर परिसर
कथा के दौरान गाए गए भक्ति भजन—“आए ना बुए तेरे लाल, खोल बुए मंदिर के”—ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। जैसे ही भजन की स्वर लहरियां गूंजीं, पूरा मंदिर परिसर भक्तिरस में डूब गया और श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे।
महिलाएं, बुजुर्ग और युवा—हर वर्ग के लोग भक्ति के इस अद्भुत संगम में शामिल होकर माता के जयकारे लगाते नजर आए। यह दृश्य किसी आध्यात्मिक उत्सव से कम नहीं था।
🔱 आठ देवी-देवताओं का भव्य मिलन बना आकर्षण का केंद्र
इस धार्मिक आयोजन का सबसे विशेष आकर्षण रहा आठ देवी-देवताओं का दिव्य मिलन। दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे देवताओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को कई गुना बढ़ा दिया।
जाबण क्षेत्र में आयोजित भागवत में निरमण्ड क्षेत्र के ऊरटू गांव से ज्येष्ठ चम्भू देवता, कुँगशी महादेव - पनेऊवी नाग, जागेश्वर महादेव दलाश, कुई कांडा बिंगड़ी नाग, डगेनी दुर्गा लाभोड़ा (निरमण्ड) तथा रामपुर बुशैहर झाकड़ी से चम्भू देवता ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। इसके अतिरिक्त कुल क्षेत्र महादेव ओलवा और बैहनी देवता पहले से ही इस आयोजन में विराजमान रहे।
देव मिलन के इस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े, जिससे पूरा क्षेत्र आस्था के महासागर में डूबा नजर आया।
🍛 भंडारे में जातीय बंधन पर चोट: सभी जातियों के लोगों ने एक साथ एक भोजन ग्रहण किया।
भागवत कथा में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी आनी के पूर्व महासचिव सतपाल ठाकुर के सौजन्य से विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस भंडारे में सभी जातियों और वर्गों के लोगों ने एक साथ बैठकर भोजन ग्रहण किया।
यह दृश्य सामाजिक समरसता, भाईचारे और एकता का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा। यहां किसी प्रकार का भेदभाव नहीं, बल्कि केवल मानवता और सेवा का भाव दिखाई दिया—जो इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।
🗣️ मुख्यातिथि ने दिया सेवा और संस्कार का संदेश
कार्यक्रम में स्टेट मिल्क फेडरेशन के चेयरमैन बुद्धि सिंह ठाकुर ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। उन्होंने कहा कि “देवी-देवताओं की भक्ति हमें संस्कार, सेवा और सच्चाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।”
वहीं,ब्लॉक कांग्रेस कमेटी आनी के पूर्व अध्यक्ष यूपेंद्र कांत मिश्रा ने विशेष के रूप में भाग लिया। उनके साथ जिला कांग्रेस अध्यक्ष सेस राम आज़ाद, अल्पसंख्यक विभाग के पूर्व अध्यक्ष नवनीत सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
इन सभी नेताओं और समाजसेवियों ने इस आयोजन को सामाजिक एकता का प्रतीक बताते हुए इसके सफल आयोजन की सराहना की।
🌸 पूर्णाहुति के साथ होगा दिव्य समापन
आयोजकों के अनुसार, नौ दिवसीय इस दिव्य कथा का समापन कल पूर्णाहुति के साथ किया जाएगा। इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना और हवन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
श्रद्धालुओं ने माता से क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की है।
🔚 आस्था, संस्कृति और एकता का अद्भुत संगम
जाबण क्षेत्र में आयोजित यह देवी भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, सांस्कृतिक संरक्षण और सामूहिक एकता का प्रतीक बनकर उभरी है।
यह आयोजन दर्शाता है कि आज भी भारतीय संस्कृति में आस्था और परंपराएं लोगों को जोड़ने की सबसे बड़ी शक्ति हैं। यहां उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि जब श्रद्धा और विश्वास एक साथ आते हैं, तो वह एक “मिनी कुंभ” का रूप ले लेते हैं।





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