बिठूजा ग्राम पंचायत में 2.39 लाख का गबन,अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बालोतरा ने दिया एफआईआर दर्ज करने का निर्देश; फर्जी बिल-वाउचर से भुगतान का आरोप - अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़

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    Sunday, March 22, 2026

    बिठूजा ग्राम पंचायत में 2.39 लाख का गबन,अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बालोतरा ने दिया एफआईआर दर्ज करने का निर्देश; फर्जी बिल-वाउचर से भुगतान का आरोप


    बालोतरा:ABD NEWS राजस्थान राज्य ब्यूरो (असरफ मारोठी) बालोतरा जिला अंतर्गत पंचायत समिति बालोतरा की ग्राम पंचायत बिठूजा में राजकोष को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से फर्जी बिल-वाउचर तैयार कर लाखों रुपए के भुगतान किए जाने के आरोपों ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बालोतरा ने प्रथम दृष्टया सज्ञेय अपराध मानते हुए पुलिस थाना जसोल को आपराधिक मुकदमा दर्ज कर विधि अनुसार अनुसंधान करने के आदेश दिए हैं।
    क्या है आरोप?
    परिवाद के अनुसार ग्राम पंचायत बिठूजा में बिना किसी वास्तविक कार्य और बिना सक्षम प्रशासनिक स्वीकृति के, अलग-अलग व्यक्तियों के निजी खातों में भुगतान किया गया। आरोप है कि यह भुगतान फर्जी बिल एवं वाउचर के आधार पर किया गया।
    मामले में विकास अधिकारी, बालोतरा द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत रिपोर्ट में यह स्वीकार किया गया कि सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी के स्तर पर राजकीय राशि के उपयोग में गंभीर अनियमितताएँ पाई गईं। रिपोर्ट के अनुसार जिला कलेक्टर, बालोतरा द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने लगभग ₹2,39,000 की अनियमितता चिन्हित की।
    जांच में क्या सामने आया?
    जांच टीम की रिपोर्ट के मुताबिक:
    फर्जी बिल-वाउचर तैयार किए गए।
    भुगतान निजी खातों में ट्रांसफर हुआ।
    सक्षम स्वीकृति या कार्य निष्पादन का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला।
    चिन्हित राशि बाद में 24.09.2025 को ग्राम पंचायत खाते में जमा करवाई गई।
    हालांकि राशि जमा कराए जाने के बावजूद न्यायालय ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए आपराधिक जांच आवश्यक समझी।
    किन पर आरोप?
    परिवाद में सरपंच किशना राम देवासी और तत्कालीन ग्राम सेवक गोवर्धन राम पर प्रथम दृष्टया लोकधन के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है। अधिवक्ता तखतसिंह नामा द्वारा प्रस्तुत परिवाद में कहा गया कि यह कृत्य “लोकातीत” प्रकृति का प्रतीत होता है और इसमें आपराधिक तत्व स्पष्ट हैं।
    न्यायालय का आदेश
    न्यायालय ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 175(3) के तहत प्रकरण पुलिस थाना जसोल को प्रेषित करते हुए निर्देशित किया कि:
    आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए,
    निष्पक्ष व विधिसम्मत अनुसंधान किया जाए,
    और शीघ्र रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाए।
    बड़ा सवाल
    ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करने वाले तंत्र के बीच यह मामला कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है:
    बिना कार्य के भुगतान कैसे स्वीकृत हुआ?
    वित्तीय नियंत्रण प्रणाली कहां विफल हुई?
    यदि जांच में अनियमितता सिद्ध थी, तो समय रहते दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
    आगे क्या?
    अब निगाहें पुलिस अनुसंधान पर टिकी हैं। यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित पदाधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई के साथ-साथ सेवा नियमों के तहत भी कठोर कार्रवाई संभव है।
    ग्राम पंचायत स्तर पर हुए इस कथित गबन ने स्थानीय प्रशासन की निगरानी प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र में व्यापक चर्चा है कि क्या यह केवल एक पंचायत तक सीमित मामला है या गहन ऑडिट की आवश्यकता है।