बालोतरा:ABD NEWS राजस्थान राज्य ब्यूरो (असरफ मारोठी) तहसील पचपदरा के राजस्व ग्राम मंडापुरा में अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के एक गंभीर रूप से बीमार और अशिक्षित किसान की कृषि भूमि के संपरिवर्तन और तत्काल बाद विक्रय रजिस्ट्री को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। परिजनों का आरोप है कि वर्ष 2007 में कृषि से आवासीय संपरिवर्तन आदेश जारी होने के मात्र 20 दिन बाद जमीन सामान्य वर्ग के व्यक्ति के नाम रजिस्ट्री कर दी गई।
राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार खसरा नंबर 802, रकबा एक बीघा (लगभग 1920.32 वर्गमीटर) भूमि स्वर्गीय ढलाराम पुत्र नारणाराम भील के नाम दर्ज थी। आरोप है कि 8 फरवरी 2007 को संपरिवर्तन आदेश जारी हुआ और 28 फरवरी 2007 को संपरिवृतित भूमि का हस्तांतरण सामान्य वर्ग के नाम नक़द राशि भुगतान दर्शा कर आयकर नियमों की अव्हेलना में रजिस्ट्री कर दी गई।
आवेदन और दस्तावेजों पर उठे सवाल
परिजनों का दावा है कि:
संपरिवर्तन आवेदन पर दिनांक अंकित नहीं, आवेदक का अंगूठा निशान प्रमाणित नहीं, 17 जनवरी 2006 की पटवारी जांच रिपोर्ट में सभी दस्तावेज संलग्न दर्शाए गए,
जबकि चालान रसीद 5 अगस्त 2006 एवं जमाबंदी नक्शा ट्रेस सहित सभी आवश्यक दस्तावेजों को पटवारी जांच रिपोर्ट दिनांक के छः से ग्यारह महीने बाद छद्म रूप से संपरिवर्तन पत्रावली में शामिल करना बताया जा रहा है। कई दस्तावेजों को पटवारी जांच रिपोर्ट के 6–11 माह बाद दिनांक के पत्रावली में जोड़े गए। इन तथ्यों को लेकर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
रजिस्ट्री प्रक्रिया पर भी आपत्ति
रजिस्ट्री दस्तावेज के अवलोकन में परिजनों ने आरोप लगाया कि कथित साक्षर क्रेता के हस्ताक्षर अनुपस्थित हैं। पहचान दस्तावेज संलग्न नहीं हैं। गवाहों में एक स्वयं क्रेता का पिता बताया गया है।
पीड़ित एसटी कृषक के परिजनों को 2024 में इस मामले का पता चला 2025 में जिला कलेक्टर के समक्ष की शिकायत
परिवार का कहना है कि उन्हें वर्ष 2024 में बेदखली वाद दायर होने पर पूरे प्रकरण की जानकारी मिली।
10 नवंबर 2025 को जिला कलेक्टर को विस्तृत शिकायत दी गई। कलेक्टर ने तहसीलदार को जांच के निर्देश दिए, परंतु चार माह बाद भी अंतिम रिपोर्ट लंबित बताई जा रही है।
तथ्यात्मक प्रमुख तिथियां
17 जनवरी 2006 – पटवारी जांच रिपोर्ट, 08 फरवरी 2007 – संपरिवर्तन आदेश, 28 फरवरी 2007 – विक्रय रजिस्ट्री, 2024 – बेदखली वाद से मामला आया सामने, 10 नवंबर 2025 से जिला कलेक्टर को लगातार शिकायते प्रस्तुत करने के बावजूद राहत नहीं।
विवाद के मुख्य बिंदु
ST भूमि का त्वरित संपरिवर्तन और हस्तांतरण
आवेदन पर दिनांक और प्रमाणन का अभाव
दस्तावेजों की तिथियों में कथित विसंगति
रजिस्ट्री में हस्ताक्षर और पहचान दस्तावेजों पर सवाल
जांच रिपोर्ट चार माह से लंबित
परिवार की मांग
परिवार ने उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच, संपरिवर्तन आदेश की वैधता की समीक्षा और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन की स्थिति
जिला प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी। जांच रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है। कानूनी जानकारों के अनुसार यदि संपरिवर्तन या विक्रय में प्रक्रियात्मक त्रुटियां या कूटरचना सिद्ध होती है तो आदेश निरस्त किए जा सकता हैं और संबंधित पक्षों पर आपराधिक कार्रवाई भी संभव है।
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