अब निजी अस्पताल मरीज की मौत के बाद शव को बिल न चुकाए जाने के बहाने रोक कर नहीं रख सकेंगे। असम सरकार ने इस पर बड़ा फैसला लेते हुए साफ किया है कि इलाज का बिल बाकी होने के बावजूद मौत के दो घंटे के भीतर शव परिजनों को सौंपना अनिवार्य होगा।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को इस संबंध में आदेश जारी किया। उन्होंने कहा, "कोई भी निजी अस्पताल अब शव को बकाया राशि के नाम पर नहीं रोक सकता। अगर ऐसा किया गया तो संबंधित अस्पताल पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।"
टोल फ्री नंबर जारी, शिकायत पर होगी तत्काल कार्रवाई
सरकार ने लोगों की सुविधा के लिए टोल फ्री नंबर 104 जारी किया है। इस नंबर पर कोई भी व्यक्ति 24 घंटे शिकायत दर्ज करा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी अस्पताल ने इस आदेश की अवहेलना की तो
3 से 5 महीने के लिए अस्पताल का लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है
या फिर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है
दोबारा गलती पर अस्पताल का पंजीकरण रद्द किया जाएगा
बिल के नाम पर अमानवीयता पर लगाम
सरकार का यह कदम उन पीड़ित परिजनों के लिए बड़ी राहत है जो मरीज की मौत के बाद भी अस्पताल में घंटों तक शव के इंतज़ार में बिल भरने की जद्दोजहद में रहते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “मौत के बाद भी अगर किसी से भुगतान की अपेक्षा रखी जाती है, तो वह अमानवीयता है। हम इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
देशभर के लिए बन सकता है उदाहरण
असम सरकार का यह निर्णय उन अन्य राज्यों के लिए भी मिसाल बन सकता है जहां अब तक ऐसी कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है।
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