सीटू से सम्बद्ध आंगनबाड़ी वर्करज़ एवं हैल्परज़ यूनियन का 14वां दो दिवसीय राज्य सम्मेलन शनिवार को ऊना में शुरू हुआ। सम्मेलन का उद्घाटन यूनियन की राष्ट्रीय अध्यक्ष ऊषा रानी ने किया, जबकि ध्वजारोहण यूनियन की राज्याध्यक्ष नीलम जसवाल ने किया। राज्य महासचिव वीना शर्मा ने सम्मेलन रिपोर्ट पेश की।
सम्मेलन को सीटू राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर ठाकुर, प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, उपाध्यक्ष जगतराम, कोषाध्यक्ष अजय दुलटा सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने संबोधित किया। इस दौरान बड़ी संख्या में यूनियन के पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित रहे।
राष्ट्रव्यापी हड़ताल को बताया ऐतिहासिक,
"10 हज़ार से ज़्यादा कर्मियों ने लिया था भाग"
सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष ऊषा रानी और डॉ. कश्मीर ठाकुर ने 9 जुलाई को आयोजित राष्ट्रव्यापी हड़ताल को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने बताया कि प्रदेशभर में दस हज़ार से अधिक आंगनबाड़ी कर्मियों ने जिला व ब्लॉक मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर आईसीडीएस के निजीकरण व बजट कटौती का विरोध किया। इस दौरान अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहे।
निजीकरण और बजट कटौती पर साधा केंद्र पर निशाना
नेताओं ने मोदी सरकार पर आईसीडीएस को निजी हाथों में सौंपने का आरोप लगाया और कहा कि "नंद घर" योजना के जरिए वेदांता कंपनी को सौंपना कर्मचारियों के भविष्य से खिलवाड़ है। उन्होंने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, पोषण ट्रैकर ऐप व 30% बजट कटौती को निजीकरण की साजिश बताया।
सम्मेलन में रखी गई प्रमुख मांगे
मिनी आंगनबाड़ी को पूर्ण दर्जा मिले, समान कार्य का समान वेतन दिया जाए।
किसी भी केंद्र को बंद न किया जाए, सभी कर्मियों को नियमित किया जाए।
गुजरात हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार तृतीय/चतुर्थ श्रेणी के तौर पर नियमित करें।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार ग्रेच्युटी लागू की जाए।
प्री-प्राइमरी स्कूल का दर्जा मिले, शिक्षित कार्यकर्ताओं को सुपरवाइजर पद पर प्रमोशन दिया जाए।
हरियाणा की तरह वेतन व सुविधाएं, पंजाब की तरह मेडिकल व छुट्टियां लागू हों।
सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष हो, वर्दी, मोबाइल रिचार्ज व स्टेशनरी के लिए आर्थिक सहायता दी जाए।
चुनाव ड्यूटी पर इंसेंटिव व अतिरिक्त कार्य का डबल भुगतान मिले।
"आंदोलन और तेज़ होगा" – केंद्र सरकार को चेतावनी
सम्मेलन में स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि आंगनबाड़ी वर्करज़ को नियमित कर्मचारी घोषित नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 2013 में हुए 45वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशें तत्काल लागू की जाएं और आंगनबाड़ी कर्मियों को पेंशन, मेडिकल, छुट्टियों की सुविधा दी जाए।
सरकार को दिया स्पष्ट संदेश
सम्मेलन में यह संकल्प लिया गया कि यदि सरकार ने आंगनबाड़ी कर्मियों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो प्रदेशभर में आंदोलनात्मक गतिविधियां और व्यापक स्तर पर चलाई जाएंगी। सम्मेलन का समापन रविवार को प्रस्तावित है, जिसमें आगे की रणनीति घोषित की जाएगी।
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