चिरेका प्रशासन का एक और दकियानूसी खुलासा
(रानी प्रसाद की रिपोर्ट)
झारखंड के मिहिजाम स्थित कुर्मीपाडा का यह पाकेट गेट वर्षों से चिरेका प्रशासन के दकियानूसी विचार का पर्यायवाची बना हुआ है। जनवरी 2024 साल से जब अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत चिरेका प्रशासन का बुलडोजर चल रहा था और चिरेका के टाउनशिप एरिया में मवेशियों की रोकथाम की जा रही थी और अवैध पाकेट गेटों को बंद किया जा रहा था,तब से इस तरह के अवैध गेटों को जबरन बंद कर दिए गये।बाद में इसी सिलसिले को जारी रखते हुए रूपनारायणपुर के पाकेट गेट को भी बंद किया गया। मगर, रूपनारायणपुर के इस गेट से कम से कम बाइक के आने-जाने के लिए रास्ता छोड़ दिया गया।
सवाल ये है कि कुर्मीपाडा के इस पाकेट गेट से भी चित्तरंजन रेलइंजन कारखाना में काम करने वाले चिरेका कर्मी आज भी आवागमन के लिए इस गेट का प्रयोग किया करते हैं। पहले तो लोगों को साइकिल कंधे पर उठाकर पार होते थे। कुछ महीने बाद रात के अंधेरे में स्थानीय लोगों ने गेट का आधा हिस्सा तोड़ दिया और साइकिल पार होने लायक जगह बना लिया। हालांकि,मिहिजाम नगर परिषद के अध्यक्ष कमल गुप्ता समेत जामताड़ा के विधायक व मंत्री डॉक्टर इरफान अंसारी ने चिरेका प्रशासन से बातचीत कर इस रास्ते भी बाइक के आवागमन के लिए तैयार करने की सिफारिश की।मगर, चिरेका प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रहा। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि इस पाकेट गेट से लेकर तैंतालीस नम्बर रास्ता तक लिंक रोड तो बनाया ही जा सकता है। चिरेका प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए।
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