हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू की खूबसूरत तीर्थन घाटी में स्थित विश्व धरोहर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के महत्व को समझाने और इसके संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए शाईरोपा में दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। क्षमता निर्माण कार्यक्रम के तहत यह प्रशिक्षण सोसाइटी फॉर नेचर एंड नेचुरल रिसोर्सिस औऱ हिमाचल प्रदेश वन विभाग के संयुक्त तत्वाधान से शाइरोपा में 16 औऱ 17 मार्च को आयोजित किया गया।
इस अवसर पर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क शमशी के वन मण्डल अधिकारी सचिन शर्मा, एसीएफ हंस राज, भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून से डॉक्टर भूमेश सिंह भदौरिया, राजस्थान से आए पर्यटन विशेषज्ञ डॉक्टर अभिनव औऱ वन रक्षक ओम प्रकाश विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस प्रशिक्षण शिविर में तीर्थन घाटी पार्क क्षेत्र इको जॉन के करीब 30 युवक युवतिओं ने भाग लिया है।
वन मण्डल अधिकारी सचिन शर्मा ने बताया कि इस शिविर में स्थानीय युवाओं को नेचर टूरिस्ट गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया गया, जिससे वे न केवल पर्यटकों को प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता की जानकारी दे सकें, बल्कि वन्यजीवों, पर्यावरण औऱ विश्व धरोहर स्थल के संरक्षण में भी अपनी अहम भूमिका निभा सकेंगे। इन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण शिविर का मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना और विश्व धरोहर स्थल के साथ इको-टूरिज्म को बढ़ावा देना रहा है। यह प्रशिक्षण न केवल युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्रदान करेगा, बल्कि विश्व धरोहर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के संरक्षण में भी मददगार साबित होगा।
भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून से आए विशेषज्ञ डा. भूमेश सिंह भदौरिया ने विश्व धरोहर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की अहमियत पर प्रतिभागियों को विस्तार से जानकारी दी। इन्होंने बताया कि बहुत लम्बी प्रक्रिया के बाद इस नेशनल पार्क को विश्व धरोहर का दर्जा मिला है जो अब इस धरोहर विरासत को संजोए रखना यहां के लोगों की भी जिम्मेबारी बनती है। इन्होने बताया कि स्थानीय नेचर गाइड इस विश्व धरोहर स्थल का वखूबी तौर पर संरक्षण एवं संवर्धन करने में अपनी एहम भूमिका निभा सकते है। इन्होंने गाइडों को ग्रेट हिमायन नेशनल पार्क की जैव विविधता, वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन, जिम्मेदार पर्यटन औऱ एक प्रशिक्षित नेचर गाइड से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। इन्होने बताया कि गाइड यह भी सुनिश्चित करें कि पर्यटन गतिविधियों से पार्क क्षेत्र के प्राकृतिक पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे।
स्थानीय युवाओं में इस प्रशिक्षण को लेकर काफ़ी उत्साह देखने को मिला है।
इस प्रशिक्षण में चार महिला नेचर गाइड ने भी भाग लिया। युवाओं का कहना है कि उनके लिए बतौर नेचर गाइड कार्य करने का शानदार अवसर मिला है जिससे वे अपनी आजीविका के साथ ही अपने क्षेत्र की विश्व धरोहर औऱ प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में योगदान दे सकते हैं। इनका कहना है कि प्रशिक्षित नेचर गाइड अब इस अनोखी जैव विविधता को और बेहतर ढंग से पर्यटकों को समझा पाएंगे।
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