हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेशों के खिलाफ हिमाचल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके परिणामस्वरूप सुप्रीम कोर्ट ने उन आदेशों पर रोक लगाते हुए सरकार को राहत प्रदान की है।
हिमाचल प्रदेश में आउटसोर्स के माध्यम से भर्तियों की प्रक्रिया अब सरल होती दिखाई दे रही है। सुप्रीम कोर्ट ने वर्तमान में हिमाचल सरकार को राहत देते हुए हाईकोर्ट के आदेशों पर अंतरिम रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने प्रतिवादी को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर उत्तर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इस मामले की सुनवाई शीर्ष कोर्ट के न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश केवी विश्वनाथन की खंडपीठ द्वारा की गई।
हिमाचल सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस मामले का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने अदालत में अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं।
बावजूद हाईकोर्ट ने 8 जनवरी 2025 को प्रदेश सरकार की ओर से आउटसोर्स पर लगी रोग को हटाने के लिए जो अर्जी दायर की गई, उसे रद्द कर दिया गया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में वेकेशन चल रही हैं, जिसकी वजह से अति महत्वपूर्ण मामलों में ही सुनवाई की जा रही है। हाईकोर्ट के इसी आदेश के खिलाफ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट में वर्ष 2022 में आउटसोर्स पॉलिसी में होने वाली भर्तियों की प्रक्रिया को लेकर एक याचिका दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि प्रदेश में विभिन्न विभागों में आउटसोर्स में जो भर्तियां की जा रही है उनमें पारदर्शिता नहीं अपनाई जा रही है। कारपोरेशन के तहत जो कंपनियां रजिस्टर है वही कटघरे के सवाल में है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स के तहत की जाने वाली नियुक्तियों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
यदि किसी व्यक्ति के साथ कोई अप्रिय घटना घटित होती है, तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इसकी जिम्मेदारी किसकी है। विभाग को इस हेतु स्थायी पदों की नियुक्ति की प्रक्रिया प्रारंभ करनी चाहिए।
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