हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार पर नौकरी घोटाले के गंभीर आरोप लगते हुए पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने कहा कि सरकार युवाओं के साथ छल कर रही है। प्रतिभाशाली और मेहनती युवा दिन-रात परीक्षा की तैयारी करते रहे, लेकिन विधानसभा सचिवालय में हुई भर्तियों में केवल नेताओं के करीबी लोगों को बैकडोर एंट्री दे दी गई।
बेरोजगारों को मिली उपेक्षा, नेताओं के रिश्तेदारों को मिली नौकरी
राजेंद्र राणा ने कहा कि प्रदेश के 68 विधानसभा क्षेत्रों में से सिर्फ तीन विधानसभा क्षेत्रों के लोगों को ही सरकारी नौकरियों में एडजस्ट किया गया। किसी नेता का पीए, किसी का ड्राइवर और किसी नेता का रिश्तेदार आसानी से सरकारी नौकरी पा गया, जबकि आम बेरोजगार युवा सिर्फ देखते रह गए।
युवाओं के लिए नौकरी के दरवाजे हुए बंद
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार सत्ता में आने के बाद हमीरपुर स्थित सेवा चयन बोर्ड को बंद कर दिया गया। युवाओं के इंटरव्यू रिजल्ट रोक दिए गए, जिससे बेरोजगारों को सड़कों पर उतरना पड़ा और भूख हड़ताल तक करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि अगर भारतीयों में गड़बड़ी हुई थी तो दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों को सजा दी जानी चाहिए थी लेकिन सुक्खू सरकार ने तो नौकरी देने वाला संस्थान ही बंद करके रख दिए ।
विधानसभा सचिवालय और स्टेट को ऑपरेटिव बैंक में गड़बड़ियों के आरोप
राजेंद्र राणा ने कहा कि विधानसभा सचिवालय में हुई नियुक्तियों की चर्चा सोशल मीडिया से लेकर अखबारों तक हो रही है। उन्होंने दावा किया कि स्टेट को ऑपरेटिव बैंक में भी 250 लोगों की जो भर्ती हुई है वो भी चर्चा में है, कांग्रेस के किसी पदाधिकारी द्वारा शिकायत करने पर मुख्यमंत्री ने विजिलेंस जाँच बैठाई, क्या यह विजिलेंस जांच लोगों को दिखाने के लिए है इससे साबित होता है कि सरकार भ्रष्टाचार को संरक्षण देने में लगी है.
तीन महीने से ठप ट्रेजरी, ठेकेदारों की रुकी पेमेंट
उन्होंने कहा कि प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि तीन महीने से ट्रेजरी बंद पड़ी है, जिससे ठेकेदारों की पेमेंट रुकी हुई है और विकास कार्य ठप पड़ गए हैं।
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