उपायुक्त सिरमौर सुमित खिमटा ने आज अपने कार्यालय में भारत सरकार के मानव-वन्यजीव संघर्ष दिशा-निर्देश, 2022 के अंतर्गत कर्नल शेरजंग राष्ट्रीय पार्क सिम्बलवाडा के लिए जोनल मास्टर प्लान तैयार करने के उद्देश्य से जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक का संचालन डीएफओ पांवटा साहिब ऐश्वर्या राज ने किया। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड से हाथियों के आवागमन के कारण पांवटा साहिब और नाहन के माजरा, गिरिनगर और कोलर क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में मानव-हाथी संघर्ष में वृद्धि देखी गई है। इसके अलावा, उन्होंने सिरमौर जिले में बाघ संरक्षण परियोजना के कार्यान्वयन की जानकारी दी और बताया कि हिमाचल प्रदेश राज्य में भी इस दिशा में प्रयास किए जा रहे है।
हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2024-25 से सीएसएस योजना की शुरुआत की जाएगी। इस योजना में हाथी गलियारों में प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली की स्थापना, लूटपाट विरोधी दस्तों की तैनाती, और प्रभावित क्षेत्रों में गज मित्रों की नियुक्ति जैसी महत्वपूर्ण पहलें शामिल हैं।
उपायुक्त सुमित खिमटा ने विभिन्न विभागों को निर्देशित किया कि वे वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित करें ताकि संघर्ष को कम करने के उपाय प्रभावी रूप से लागू हो सकें। उन्होंने बिजली विभाग से ढीली बिजली लाइनों की मरम्मत, पुलिस विभाग से संघर्ष के दौरान भीड़ प्रबंधन, और कृषि विभाग से मुआवजे तथा सौर बाड़ लगाने के लिए जागरूकता शिविर आयोजित करने का अनुरोध किया।
इसके अतिरिक्त, उपायुक्त ने सभी संबंधित विभागों को कर्नल शेरजंग राष्ट्रीय पार्क के जोनल मास्टर प्लान के लिए वन विभाग के साथ लिखित समन्वय करने का निर्देश दिया।
बैठक में उपमंडल दंडाधिकारी नाहन राजीव सांख्यान, वन मंडल अधिकारी अवनी भूषण, जिला उद्योग केन्द्र के प्रबंधक डॉ. ठाकुर भगत, पर्यटन विभाग के मंजीत सिंह, उप निदेशक उच्च शिक्षा हिमेन्द्र सिंह, उप निदेशक प्रारंभिक शिक्षा राजीव ठाकुर, तथा अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए।
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