हिंडनबर्ग का बड़ा दावा, कहा- SEBI चीफ का अडानी स्कैंडल से है कनेक्शन
अडानी ग्रुप के बाद हिंडनबर्ग ने इस बार मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) पर निशाना साधा है. अमेरिकी शॉर्ट-सेलर ने कहा है कि सेबी की चेयरपर्सन माधबी बुच और उनके पति के पास अडानी मनी साइफनिंग स्कैंडल में इस्तेमाल की गई अब्स्क्युर ऑफशोर एंटिटी में हिस्सेदारी थी.
नई दिल्ली. पिछली बार अडानी ग्रुप पर हमला करने वाले अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च (Hindenburg Research) ने इस बार भारत के मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) पर निशाना साधा है. दरअसल, अमेरिकी शॉर्ट-सेलर ने शनिवार (10 अगस्त) को सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच (Madhabi Buch) को लेकर बड़ा दावा किया है. हिंडनबर्ग ने कहा कि व्हिसलब्लोअर दस्तावेजों से पता चला है कि सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और उनके पति के पास अडानी मनी साइफनिंग स्कैंडल में इस्तेमाल की गई अब्स्क्युर ऑफशोर एंटिटी में हिस्सेदारी थी.
बता दें कि हिंडनबर्ग ने 24 जनवरी, 2023 को ‘अडानी ग्रुप: हाउ द वर्ल्ड्स थर्ड रिचेस्ट मैन इज पुलिंग द लार्जेस्ट कॉन इन कॉरपोरेट हिस्ट्री’ शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी. रिपोर्ट में अडानी ग्रुप पर बड़े पैमाने पर कॉरपोरेट कदाचार और शेयर-कीमत में हेरफेर का आरोप लगाया गया था.
हिंडनबर्ग रिसर्च ने अपनी वेबसाइट पर इस खुलासे दावा करते हुए इससे संबंधित रिपोर्ट शेयर की। हिंडनबर्ग रिसर्च ने आरोप लगाया है कि व्हिसलब्लोअर से मिले डॉक्यूमेंट्स से पता चलता है जिन ऑफशोर संस्थाओं का इस्तेमाल अडानी मनी साइफनिंग स्कैंडल में हुआ, उसमें SEBI अध्यक्ष माधबी पुरी बुच की हिस्सेदारी थी। हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मौजूदा सेबी अध्यक्ष और उनके पति धवल बुच के पास ठीक उसी अस्पष्ट ऑफशोर बरमूडा और मॉरीशस फंड में हिस्सेदारी थी, जिसका इस्तेमाल विनोद अडानी ने किया था। दुबई में रहने वाले विनोद गौतम अडानी के बड़े भाई हैं।
रिपोर्ट में व्हिसलब्लोअर दस्तावेजों का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि बुच ने 5 जून 2015 को सिंगापुर में आईपीई प्लस फंड 1 के साथ अपना खाता खोला था। कहा जाता है कि ऑफशोर मॉरीशस फंड को इंडिया इंफोलाइन के माध्यम से अडानी के एक निदेशक द्वारा स्थापित किया गया था और यह टैक्स हेवन मॉरीशस में रजिस्टर्ड है। हिंडनबर्ग ने आरोप लगाया कि विनोद अडानी के पैसे के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए जाने के अलावा इस छोटे से फंड का अडानी से अन्य करीबी संबंध भी था। IPE प्लस फंड के फाउंडर और मुख्य निवेश अधिकारी (CIO) अनिल आहूजा थे। उसी समय आहूजा अडानी एंटरप्राइजेज के निदेशक थे। इससे पहले वे अडानी पावर के निदेशक थे।
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