9.50 रुपए की दर से लेनी पड़ रही 40 लाख यूनिट बिजली; प्रदेश में 24 लाख घरेलू उपभोक्ता, उद्योगों में 84 फीसदी खपत।
इस प्रचंड सर्दी में यदि आपके घर या उद्योग तक बिजली आ रही है, तो राज्य सरकार इसके लिए भी पेनल्टी भरने को मजबूर है। कारण यह है कि भयंकर सूखे के कारण विद्युत उत्पादन हर साल से भी 10 फीसदी नीचे है और कोहरे तथा धुंध के कारण सोलर प्रोजेक्ट भी बेहाल हैं। बरसात में लारजी प्रोजेक्ट भी ठप हो गया था, जिसकी अब एक यूनिट ही चली है। हिमाचल में कुल विद्युत उपभोक्ता 28.50 लाख हैं। इनमें से 24 लाख उपभोक्ता घरेलू हैं, जबकि 4.30 लाख औद्योगिक हैं। औद्योगिक उपभोक्ताओं में भी 2000 बड़े उद्योगों वाले हैं और बाकी कॉमर्शियल यूनिट्स हैं, लेकिन बिजली की कुल खपत में से 84 फ़ीसदी औद्योगिक इस्तेमाल में चली जाती है। वर्तमान में हाल यह है कि राज्य में सभी को बिजली देने के लिए प्रतिदिन 380 लाख यूनिट की जरूरत है, जबकि सारे संसाधनों से 360 लाख यूनिट बिजली ही मिल पा रही है। इनमें 12.12 लाख यूनिट अपनी जेनरेशन से आ रही है, जबकि फ्री पावर के हिस्से के तौर पर 105 लाख यूनिट बिजली मिल रही है। बैंकिंग पर वापस आ रही बिजली 155 लाख यूनिट है।
द्विपक्षीय परचेज के जरिए 48 लाख यूनिट बिजली का इंतजाम किया जा रहा है, जबकि 40 लाख यूनिट बिजली ओपन मार्केट से लेनी पड़ रही है। इस खरीद में भी ट्रांसपोर्टेशन चार्जेज दो से अढ़ाई रुपए लग रहे हैं, जिस कारण यह बिजली नौ रुपए से ज्यादा प्रति मिनट रेट पर मिल रही है। इस सबको मिलाकर 360 लाख यूनिट बिजली हो रही है और 20 लाख यूनिट बिजली अभी कम है। कट लगाने के लिए सरकार ने इनकार किया हुआ है। वर्तमान में राज्य के 16 बड़े बिजली प्रोजेक्ट में 1660 मेगावाट विद्युत क्षमता है, लेकिन इनमें अभी विद्युत उत्पादन सिर्फ 34.12 लाख यूनिट हो रहा है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में यह 43.93 लाख यूनिट होना चाहिए था। राज्य में पावर कॉरपोरेशन और प्राइवेट मिलकर चार सोलर पावर प्लांट हैं। ये 18.90 मेगावाट क्षमता के हैं, लेकिन इनमें से भी सिर्फ 0.98 लाख यूनिट बिजली ही मिल पा रही है। वजह यह है कि सुबह 9:00 से 12:00 तक रहने वाली धुंध के कारण प्लांट नहीं चल पा रहे हैं।
एक साल से भुगतान नहीं हुआ
हिमाचल में पावर कारपोरेशन के पास काशंग, सावड़ा कुड्डू और सैंज के तीन प्रोजेक्ट हैं। हालांकि इन प्रोजेक्ट से आजकल सिर्फ 5.57 लाख यूनिट बिजली ही मिल रही है, लेकिन पावर कारपोरेशन का भुगतान बिजली बोर्ड ने एक साल से नहीं किया है। यह देनदारी 250 करोड़ से ऊपर हो गई है।
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