"हिल एंबुलेंस" पहाड़ो पर मरीजों को अस्पताल पहुँचाने के लिए एक बेहतर अविष्कार है। यह मरीज के भार को बाँट कर भारहीनता का अनुभव करवाता है, जिससे मरीज तेजी के साथ अस्पताल पहुंच सकता है। इसमें मरीज की सुरक्षा का ध्यान एखा गया है जिससे परिवहन के समय मरीज़ को कोई चोट न पहुंचे. हिल एम्बुलेंस को उठाने के लिए केवल दो व्यक्तियों की ही आवश्यकता पड़ती है। यह उठाने मैं आसान तथा सुरक्षित है। इसे कण्ट्रोल किया जा सकता है ताकि पहाड़ी रास्तों पर इसे आसानी से उठाया जा सके। दो हिस्सों के इस इन्नोवेशन को सामान्य चोट अथवा बीमारी के समय चेयर एम्बुलेंस तथा गंभीर स्तिथि में स्ट्रेटचर एम्बुलेंस के रूप मे इस्तेमाल किया जा सकता है।पहाड़ी रास्तों मे चलते समय उबड़ खाबड़ रास्तों की बजह से लगने वाले झटकों को कम करने के लिए इसमें शॉक अब्जॉर्बर भी लगाया गया है।
हाल ही में इंस्पायर अवार्ड मानक योजना के तहत 11 वीं जिल्ला स्तरीय प्रदर्शनी एवं मॉडल प्रतियोगिता राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मंडी में हुआ! जिसमें जिला कुल्लू के 14 और मंडी जिला के 33 नन्हे वैज्ञानिकों ने भाग लिया और अपने मॉडल प्रस्तुत किए जिला कुल्लू से दो मॉडल राज्य स्तर के लिए चयनित हुए जबकि मंडी से तीन मॉडल राज्य स्तर के लिए चयनित हुए कुल्लू जिले से सौरव कौशल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला नम्होंग से 8th कक्षा के छात्र का मॉडल कुल्लू जिले का सबसे सर्वश्रेष्ठ मॉडल चुना गया । सौरभ कौशल ने हिल एंबुलेंस नमक मॉडल प्रस्तुत किया , यह मॉडल राज्य स्तर के क लिए चयनित हुआ है जिसके लिए स्कूल प्रभारी श्री राम सिंह ठाकुर ने सौरभ और इनके माता पिता को बधाई दी है ,और राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं दी है!
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