3 अगस्त।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मानहानि केस को लेकर एक हलफ़नामा दाख़िल कर कहा है कि केस को रफ़ा-दफ़ा करने के लिए वो माफ़ी नहीं मागेंगे।
उन्हें यह भी कहा कि सूरत अदालत की सजा उचित नहीं है और वे पूरी तरह से उम्मीद करते हैं कि ये अपील देश की सर्वोच्च अदालत में सफल होगी। उनका कहना था कि वह माफी मांगने को तैयार नहीं हैं, भले ही वे चाहते हैं कि सजा पर रोक लगे और फिर से सांसद बन सकें।
राहुल गांधी ने बीजेपी के विधायक पुर्णेश मोदी की आलोचना की है।
शिकायतकर्ता पुर्णेश मोदी ने अदालत में पेश किए गए हलफनामे में राहुल गांधी को उनके ब्यान पर माफी नहीं मांगने के कारण उन्हें “अहंकारी ” बताया। गुरुवार को इसके जवाब में राहुल गांधी ने कहा, “बिना किसी ग़लती के याचिकाकर्ता पर आपराधिक केस करके, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत सदस्यता रद्द करके किसी को माफ़ी मांगने के लिए मज़बूर करना न्यायिक प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है ।” वरिष्ठ वकील प्रशांत सेन, रजिंदर चीमा और अभिषेक मनु सिंघवी इस मामले में राहुल गांधी की पैरवी कर रहे हैं।
साथ ही, कांग्रेस नेता ने कहा कि वह पूरी तरह से उम्मीद करते हैं कि वे इस कोर्ट में सफल होंगे क्योंकि यह एक "असाधारण मामला" है और निर्वाचित सांसद के रूप में उन्हें लंबे समय से अयोग्य ठहराया गया है।
राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी सजा पर रोक लगाने की अपील करते हुए कहा कि पूर्णेश मोदी ने अपने कथित आपराधिक इतिहास को दिखाने के लिए उनके खिलाफ कई लंबित मामलों का सहारा लिया है, जो किसी अन्य मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है और अधिकांश मामले प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दलों के नेताओं की ओर से दर्ज कराए गए हैं।
हलफ़नामे में कहा गया है, “याचिकाकर्ता एक सांसद और विपक्ष के नेता हैं और इसलिए सत्ता में बैठे लोगों का आलोचनात्मक मूल्यांकन करना ज़रूरी था।” मानहानि का उद्देश्य था या नहीं, यह जानने के लिए भाषण को पूरा सुनना चाहिए। इसके अलावा, यह स्पष्ट है कि मानहानि एक अनदेखा, कंपाउंडेबल और दंडनीय अपराध है।”
गांधी ने कहा कि सूरत अदालत की ओर से दो साल की अधिकतम सज़ा देने का फैसला असाधारण था और इसकी रोक पर विचार किया जाए।
राहुल गांधी की अपील चार अगस्त को जस्टिस बीआर गवई की अगुवाई वाली पीठ में विचाराधीन होगी।
21 जुलाई को गुजरात हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ गांधी की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया, जो उनकी दो साल की सजा पर रोक लगाने से इनकार करता था।
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