दीपक प्रोजेक्ट वर्करज़ यूनियन सम्बन्धित सीटू का सोलह सदस्यीय प्रतिनिधिमण्डल सीमा सड़क संगठन बीआरओ के कमांडर डी.एन.दाहट से उनके कार्यालय ज़्यूरी में मिला व उन्हें बीस सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। बीआरओ कमांडर ने यूनियन को आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों को जल्द ही पूर्ण कर दिया जाएगा। सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, सचिव कुलदीप डोगरा, मदन नेगी व यूनियन अध्यक्ष प्रेम लाल ने कहा है कि बीआरओ कमांडर ने आश्वासन दिया है कि काज़ा से लोसर तक बीआरओ के अंतर्गत बनने वाली सड़क को निजी कम्पनी के हवाले देने के बावजूद एक भी मजदूर को नौकरी से नहीं निकाला जाएगा व उनकी नौकरी यथावत बनी रहेगी। न ही किसी मजदूर की छंटनी होगी और न ही किसी की वेतन कटौती होगी। कमांडर ने आश्वासन दिया कि मजदूरों की रिहाईशों को पक्का करने, नई बिजली लाइनें बिछाने, पानी की ज़्यादा टंकियां, यातायात हेतु अतिरिक्त गाड़ियां, नए शौचालयों व स्नानागारों का निर्माण, बकाया एरियर व बोनस का भुगतान करने, वेतन अवकाश दिवस, जैकेट, जूते, दस्ताने उपलब्ध करवाने, ट्रेड अनुसार वेतन देने, कार्य करने के औजार, मिट्टी तेल व लकड़ी के ईंधन आदि की सुविधा तुरन्त उपलब्ध करवा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 के बाद डिस्चार्ज किए गए मजदूरों को क्रमबद्ध तरीके से बहाल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मजदूरों को श्रम कानूनों के तहत मिलने वाली ग्रेच्युटी, ईपीएफ, बोनस, छुट्टियों आदि मांगों को उचित मंच पर उठाकर इनका समाधान किया जाएगा। उन्होंने बसन्तपुर में डयूटी के दौरान जान गंवाने वाले पूर्ण चंद के परिवार के एक सदस्य को रोज़गार देने व मुआवज़ा देने का आश्वासन दिया।
विजेंद्र मेहरा व कुलदीप डोगरा ने चेताया है कि अगर मजदूरों की मांगें पूर्ण न हुईं तो आंदोलन तेज होगा। उन्होंने कहा कि देश के श्रम कानूनों का बीआरओ में लगातार उल्लंघन हो रहा है। मजदूरों को ईपीएफ, छुट्टियों, मेडिकल सुविधा, ग्रेच्युटी, छंटनी भत्ता, नोटिस पे सुविधा नहीं दी जा रही है। बोनस भी नियमानुसार नहीं मिल रहा है। उन्हें नियमानुसार साप्ताहिक अवकाश के अलावा 39 छुट्टियां दी जाएं। मजदूरों को आवास सुविधा नहीं है। जहां आवास सुविधा दी गई है उसकी स्थिति दयनीय है। मजदूरों को कई जगह बिजली, शौचालय, स्नानागार व पानी की सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। मजदूरों को डयूटी पर जाने व दुर्गम पहाड़ी इलाकों में उनके बच्चों को स्कूल आने जाने के लिए गाड़ियों की उचित सुविधा नहीं है। विभाग के कल्याण फंड से इन दुर्गम क्षेत्रों में कार्य करने वाले हजारों मजदूरों को न तो मुफ्त राशन दिया जा रहा है और न ही उन्हें राशन कार्ड के ज़रिए राशन व्यवस्था की जा रही है। भारी बर्फबारी वाले इन इलाकों में मजदूरों को मिट्टी के तेल व लकड़ियों की सुविधा भी नहीं दी जा रही है। मजदूरों को सर्दी से बचने के लिए जूते, जैकेट व दस्ताने भी नहीं दिए जा रहे हैं। मजदूरों को समय से वेतन नहीं मिल रहा है। दूरदराज स्थित बैंकों तक पहुंचने के लिए छुट्टी नहीं दी जा रही है। उन्हें ट्रेड के अनुसार वेतन नहीं मिल रहा है। उन्हें झाड़ू, गैंती, फावड़ा, बेलचा, करण्डी व अन्य काम करने के औजार खुद के पैसे से खरीदने पड़ रहे हैं। उन्हें गाड़ियों के अभाव में आठ बजे के बजाए सुबह छः बजे ही डयूटी पर जाना पड़ रहा है। वर्ष 2019 के बाद कई मजदूरों की बिना कारण या तो छंटनी की गई है या फिर उन्हें डिस्चार्ज किया गया है। मजदूरों के श्रमिक कल्याण बोर्ड के तहत मिलने वाले वज़ीफ़े, शादी, मृत्यु, मेडिकल व पेंशन आदि लाभ रोक दिए गए हैं। इन्हें तुरन्त बहाल किया जाए। मजदूरों के बढ़े हुए वेतन की बकाया राशि अथवा एरियर का तुरन्त भुगतान किया जाए।
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