मानसिक मंदता, ऑटिज्म, सेरीब्रल पाल्सी और बहु-विकलांगता के शिकार व्यक्तियों के कल्याण के लिए बनाए गए राष्ट्रीय न्यास अधिनियम 1999 के अंतर्गत स्थानीय स्तरीय समिति की त्रैमासिक बैठक शनिवार को उपायुक्त हेमराज बैरवा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। जिले में उक्त विकलांगताओं के शिकार व्यक्तियों के कल्याण, इनके लिए कानूनी संरक्षकों की नियुक्ति और अन्य मुद्दों पर बैठक के दौरान व्यापक चर्चा की गई।
इस अवसर पर उपायुक्त ने बताया कि इस तरह की विकलांगताओं के शिकार व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय न्यास अधिनियम 1999 के तहत कानूनी संरक्षक नियुक्त करने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष की आयु तक तो ऐसे बच्चों के माता-पिता ही स्वभाविक रूप से उनके कानूनी संरक्षक होते हैं। 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद इन नि:शक्त लोगों के लिए कानूनी संरक्षक नियुक्त किए जाते हैं, ताकि इनके अधिकारों की रक्षा हो सके। उपायुक्त ने बताया कि जिला हमीरपुर में अभी तक ऐसे 173 दिव्यांगजनों को विधिक संरक्षता प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि जिला में मानसिक मंदता, ऑटिज्म, सेरीब्रल पाल्सी और बहु-विकलांगता के शिकार सभी दिव्यांगजनों तक राष्ट्रीय न्यास अधिनियम 1999 की योजनाओं लाभ पहुंचना चाहिए। इसके लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारी फील्ड में राष्ट्रीय न्यास अधिनियम 1999 के विभिन्न प्रावधानों का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें तथा पात्र लोगों के रिश्तेदारों का मार्गदर्शन एवं हरसंभव मदद करें।
बैठक में कानूनी संरक्षकों की नियुक्ति के लिए प्राप्त 3 आवेदनों को स्थानीय स्तरीय समिति ने अनुमोदित कर दिया। जबकि, एक अन्य आवेदन की समीक्षा के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग को निर्देश जारी किए।
इस अवसर पर जिला कल्याण अधिकारी राकेश पुरी ने राष्ट्रीय न्यास अधिनियम 1999 और कानूनी संरक्षकों की नियुक्त के विभिन्न आवेदनों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। बैठक में डीआरडीए के परियोजना अधिकारी राजकुमार, स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर अजय अत्री, अन्य विभागों के अधिकारी तथा समिति के गैर सरकारी सदस्य भी उपस्थित थे।
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