विश्व पशु चिकित्सा दिवस के उपलक्ष्य पर शनिवार को पशु पालन विभाग के उपनिदेशक कार्यालय हमीरपुर में एक संगोष्ठी आयोजित की गई। सहायक निदेशक डॉ. अजय चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित इस संगोष्ठी में पशु चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों ने भाग लिया।
इस अवसर पर डॉ. अजय चौधरी ने बताया कि हर वर्ष अप्रैल के अंतिम शनिवार को विश्व पशु चिकित्सा दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है और पशु पालन को खेती का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग माना जाता है। यह प्रत्यक्ष रूप से किसानों की आर्थिकी से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि पशु पालन के माध्यम से किसानों की आय में काफी वृद्धि की जा सकती है। पशु पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। सहायक निदेशक ने पशु चिकित्सकों से आग्रह किया कि वे इन योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करें तथा लोगों को अधिक से अधिक पशु पालन के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि पशु पालकों का नियमित रूप से मार्गदर्शन किया जाना चाहिए तथा उन्हें अच्छी नस्ल के पशुओं के पालन के संबंध में जानकारी दी जानी चाहिए। सहायक निदेशक ने कहा कि पशु चिकित्सा एक नोबल प्रोफेशन, जिसमें निस्वार्थ भाव से पशु कल्याण का कार्य किया जाता है। युवाओं को इसके लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
संगोष्ठी के दौरान इस वर्ष के विश्व पशु चिकित्सा दिवस के थीम और पशु पालन प्रौद्योगिकी एवं नवीनत्तम तकनीक पर व्यापक चर्चा की गई। पशु चिकित्सा व्यवसाय में विविधता एवं संभावनाओं पर भी विशेषज्ञों ने विचार सांझा किए। इस अवसर पर पशुओं में मुंहपका-खुरपका रोग के नियंत्रण के लिए टीकाकरण कार्यक्रम का शुभारंभ भी किया गया।
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