उपायुक्त देबश्वेता बनिक ने जल शक्ति विभाग, कृषि-बागवानी, पशुपालन, स्वास्थ्य, वन, राजस्व और अन्य विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जिला में कम बारिश और आने वाले समय में सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दें। सोमवार को मुख्य सचिव के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई प्रदेश स्तरीय बैठक के बाद जिला के अधिकारियों के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त ने ये निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि इस बार जिला हमीरपुर में सर्दी के सीजन में बहुत ही कम बारिश हुई है। इससे जिले के जलस्रोतों, पेयजल योजनाओं, कृषि, बागवानी और अन्य संबंधित क्षेत्रों के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। उपायुक्त ने जल शक्ति विभाग के अधिकारियों से कहा कि वे सभी पेयजल योजनाओं की ताजा स्थिति पर नजर रखें तथा जलस्रोतों की नियमित रूप से सफाई एवं पानी की सैंपलिंग-टेस्टिंग सुनिश्चित करें। अगर किसी पेयजल योजना में पानी की कमी हो जाती है तो वैकल्पिक व्यवस्थाओं या अन्य स्कीमों से पानी की आपूर्ति की संभावना तलाश करें। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत जिन स्कीमों के कार्य अंतिम चरण में हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें, ताकि लोगों को तत्काल पर्याप्त पेयजल उपलब्ध करवाया जा सके। उपायुक्त ने कहा कि पानी की कमी के कारण कई बार लोग प्राकृतिक जलस्रोतों का रुख भी करते हैं। इसलिए इन जलस्रोतों की सफाई भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी पानी की नियमित रूप से सैंपलिंग-टेस्टिंग करने तथा जल जनित रोगों से बचाव के लिए पर्याप्त प्रबंध करने के निर्देश दिए। उपायुक्त ने कृषि और बागवानी विभाग के अधिकारियों को फसलों के नुक्सान का सही आकलन करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने पशुपालन विभाग के अधिकारियों से कहा कि वे आवश्यकता पडऩे पर पशु चारे की तुरंत व्यवस्था करें। देबश्वेता बनिक ने कहा कि गर्मियों में वनों में आग की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग के अधिकारी अग्निशमन विभाग तथा स्थानीय पंचायत जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित करें।
एफसीए एवं एफआरए के मामलों पर भी की चर्चा
उपायुक्त देबश्वेता बनिक ने जिला में विभिन्न विकास कार्यों से संबंधित एफसीए एवं एफआरए के मामलों की समीक्षा भी की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं लगातार इन मामलों की समीक्षा कर रहे हैं। इसलिए इनमें अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इन मामलों के जल्द निपटारे के लिए वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित करें और किसी भी तरह की अड़चन आने पर तुरंत जिला प्रशासन के ध्यान में लाएं।
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