एसएफआई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने सोमवार को पिंक पेटल चौक पर कुश्ती पहलवानों के साथ हुए यौन शौषण पर केंद्र सरकार को आड़े हाथ लेते हुए पहलवानों के प्रति अपनी एकजुटता दिखाई है ।
धरने में बैठे पहलवानो ने खेलमंत्री से बातचीत करने के बाद भले ही अपने धरने को उठा लिया हो हालांकि इसके लिए खेल मंत्रालय ने एक समिति गठित करने की पहल भी की है जो पहलवानों के तमाम आरोपों की जांच करेगी और उसकी रिपोर्ट के मुताबिक उचित कार्यवाही करेगी।
एसएफआई ने करीब तीस साल से अंर्तराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पहलवान कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष व बीजेपी सांसद बृज भूषण शरण सिंह पर यह आरोप लगाते हुए कहा कि खिलाड़ियों के साथ उनका व्यवहार अशोभन है और उन्होंने कई महिला खिलाडियों का भी यौन शौषण किया है। कई प्रशिक्षक भी ऐसी गतिविधियों में शामिल है । खेल संघों के पदाधिकारियों और प्रशिक्षकों के आचरण को लेकर लगातार शिकायते मिलती रही है उनमें अनियमितता के भी गंभीर आरोप लगाते रहे है। खासकर महिला खिलाडियों के यौन शौषण को लेकर सख्त कार्रवाई की मांग उठती रही है ।कई मामलों में ये भी देखा जा चुका है कि प्रशिक्षक या किसी पदाधिकारी को यौन प्रताड़ना की शिकार खिलाड़ियों ने खुदखुशी कर ली ।इसलिए खेल संघों को साफ सुथरा और सुरक्षित बनाने की मांग उठती रही है। ऐसे आरोपों में अक्सर देखा जाता है कि जांच समितियों की सिफारिश खिलाड़ियों के खिलाफ ही आती है मगर इसमें यौन शौषण का गंभीर आरोप शामिल है इसीलिए अगर उसकी जांच में किसी तरह का पक्षपात किया गया तो खिलाड़ियों का मनोबल टूटेगा और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गलत संदेश जाएगा । आलोंपिक राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में सबसे अधिक पदक कुश्ती में ही आए है ऐसे में अगर इसके खिलाड़ियों को उचित मानसिक वातावरण में खेलने की व्यवस्था नही हो पाई तो ये केंद्र सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय बन जायेगा ।
एसएफआई मांग करती है कि कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष को उनके पद से हटाया जाए और कुश्ती महासंघ का पुनर्गठन किया जाए।
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