छात्र अभिभावक मंच हिमाचल प्रदेश ने निजी स्कूलों की मनमानी लूट व भारी फीस बढ़ोतरी के खिलाफ उच्चतर शिक्षा निदेशालय शिमला के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद मंच का प्रतिनिधिमण्डल शिक्षा निदेशक अमरजीत शर्मा से मिला व उन्हें एक मांग-पत्र सौंपा। निदेशक ने आश्वासन दिया कि निजी स्कूलों में आम सभाएं आयोजित करने,पीटीए के गठन व वर्ष 2022 की फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाने के लिए तुरन्त आदेश जारी कर दिए जाएंगे। इस बाबत वह जल्द अधिसूचना जारी करेंगे। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों पर नकेल कसने के लिए कानून व रेगुलेटरी कमीशन बनाने का प्रस्ताव वह जल्द सरकार को भेजेंगे। प्रदर्शन में विजेंद्र मेहरा,विवेक कश्यप,बालक राम,विनोद बिरसांटा,रामप्रकाश,पूर्ण चंद,वीरेंद्र नेगी,दलीप,प्रताप चंद,अमित कुमार,हिमी देवी,राकेश,अशोक,राकेश,नितीश राज़टा,विकास कुमार,विक्रम सिंह,चमन लाल,दर्शन लाल,नरेश,सीमा,रजनी आदि मौजूद रहे।
मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा व सह संयोजक विवेक कश्यप ने निजी स्कूलों में भारी फीसों,मनमानी लूट,फीस वृद्धि व गैर कानूनी फीस वसूली पर रोक लगाने के लिए प्रदेश सरकार से कानून बनाने की मांग की है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से मांग की है कि वे निजी स्कूलों की मनमानी लूट व भारी फीस बढ़ोतरी पर अपना रुख स्पष्ट करें। उन्होंने प्रदेश सरकार को चेताया है कि अगर कानून पर सरकार ने सकारात्मक रुख न अपनाया तो निजी स्कूलों से प्रदेश सरकार व शिक्षा विभाग की मिलीभगत के खिलाफ छात्र अभिभावक मंच मोर्चा खोलेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से अपील की है कि वह निजी स्कूलों पर नकेल कसने के लिए कानून को अमलीजामा पहनाने की पहलकदमी करें ताकि प्रदेश के छात्रों व अभिभावकों को न्याय मिल सके। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से निजी स्कूलों की मनमानी लूट व भारी फीसों पर रोक लगाने के लिए कानून व रेगुलेटरी कमीशन बनाने के मुद्दे को अपने घोषणा - पत्र में शामिल करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश सरकार व विपक्ष की नाकामी व उनकी निजी स्कूलों से मिलीभगत के कारण ही निजी स्कूल लगातार मनमानी कर रहे हैं। कोरोना काल में भी निजी स्कूल टयूशन फीस के अलावा एनुअल चार्जेज़,कम्प्यूटर फीस,स्मार्ट क्लास रूम,मिसलेनियस,केयरज़,स्पोर्ट्स,मेंटेनेंस,इंफ्रास्ट्रक्चर,बिल्डिंग फंड,ट्रांसपोर्ट व अन्य सभी प्रकार के फंड व चार्जेज़ वसूलते रहे हैं। निजी स्कूलों ने बड़ी चतुराई से वर्ष 2022 में कुल फीस के अस्सी प्रतिशत से ज़्यादा हिस्से को टयूशन फीस में बदल कर लूट को बदस्तूर जारी रखा है। उन्होंने प्रदेश सरकार पर निजी स्कूलों से मिलीभगत का आरोप लगाया है। कानून का प्रारूप तैयार करने में ही इस सरकार ने तीन वर्ष का समय लगा दिया। दो साल पहले अभिभावकों ने कानून को लेकर दर्जनों सुझाव दिए हैं तब भी जान बूझकर यह सरकार कानून बनाने में आनाकानी कर रही है। पिछले बजट अथवा मानसून सत्र में कानून हर हाल में बनना चाहिए था। परन्तु सरकार की संवेदनहीनता के कारण कानून अभी तक भी नहीं बन पाया है। सरकार की नाकामी के कारण ही बच्चों की फीस में पिछले दो वर्षों में पन्द्रह से पचास प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है व इस बढ़ोतरी पर सरकार मौन है।
उन्होंने कहा है कि फीस वसूली के मामले पर वर्ष 2014 के मानव संसाधन विकास मंत्रालय व 5 दिसम्बर 2019 के शिक्षा विभाग के दिशानिर्देशों का निजी स्कूल खुला उल्लंघन कर रहे हैं व इसको तय करने में अभिभावकों की आम सभा की भूमिका को दरकिनार कर रहे हैं। स्कूलों में सत्र समाप्ति की ओर है व शिक्षा विभाग के दिशानिर्देश के बावजूद भी 99 प्रतिशत स्कूलों में पीटीए का गठन नहीं हुआ है।
इस पर प्रदेश सरकार व शिक्षा विभाग दोनों खामोश हैं। निजी स्कूल अभी भी एनुअल चार्जेज़ की वसूली करके एडमिशन फीस को पिछले दरवाजे से वसूल रहे हैं व हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के वर्ष 2016 के निर्णय की अवहेलना कर रहे हैं। जिसमें उच्च न्यायालय ने सभी तरह के चार्जेज़ की वसूली पर रोक लगाई थी। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह निजी स्कूलों में फीस,पाठयक्रम व प्रवेश प्रक्रिया को संचालित करने के लिए तुरन्त कानून बनाए व रेगुलेटरी कमीशन का गठन करे।
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