हिमाचल प्रदेश में धर्म परिवर्तन कानून को और कड़ा कर दिया गया है। अब अनुसूचित जाति और अन्य आरक्षित श्रेणी के व्यक्ति ने अगर धर्म परिवर्तन किया तो उसे आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाएगा। आरक्षण का लाभ छोड़ने के लिए संबंधित शख्स को एफिडेविट देना होगा। शनिवार को प्रदेश की जयराम सरकार ने आखिरी सेशन के अंतिम दिन विपक्ष के भारी हंगामे के बीच इससे जुड़े कानून में संशोधन को मंजूरी दे दी।
प्रदेश में इस साल नवंबर-दिसंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं। अब उससे पहले विधानसभा का कोई सेशन नहीं होगा। शनिवार को विधानसभा के मानसून सत्र में पास किए गए धर्मांतरण संबंधी नए एक्ट का नाम 'हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता संशोधन विधेयक 2022' है।
संशोधित कानून के अनुसार अब जबरन या किसी तरह के लालच से सामूहिक धर्म परिवर्तन को अपराध की श्रेणी में रखा गया है। अब यदि 2 या उससे ज्यादा व्यक्तियों ने धर्म परिवर्तन किया तो उसे सामूहिक धर्म परिवर्तन माना जाएगा। पकड़े जाने पर सभी को सीधे 10 साल की जेल और 2 लाख रुपए तक का जुर्माना भरना होगा।
हिमाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य है। यहां वर्ष 2005 में वीरभद्र सिंह की अगुआई वाली कांग्रेस सरकार ने यह कानून बनाया था। उसके बाद हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेशों पर वीरभद्र सिंह की ही अगुआई वाली पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इस एक्ट के कुछ प्रावधान रद्द किए गए। वर्ष 2017 में प्रदेश में बनी बीजेपी सरकार ने शनिवार को आखिरी सेशन के आखिरी दिन इस एक्ट में कुछ कड़े प्रावधान जोड़े।
इस एक्ट में धर्म परिवर्तन का दोषी पाए जाने पर 7 साल की सजा का प्रावधान था। अब इसे बढ़ाकर 10 साल किया गया है। यही नहीं, यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति से विवाह करने के लिए अपने धर्म को छिपाता है तो उस सूरत में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ भी 3 से 10 साल तक की सजा और कम से कम 50 हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है। जुर्माने की रकम अधिकतम एक लाख रुपए तक बढ़ाई जा सकती है।
इस विधेयक के अनुसार व्यक्ति को धर्म परिवर्तन करने से एक महीना पहले मजिस्ट्रेट के समक्ष एफिडेविट देना होगा। यदि कोई अपने मूल धर्म में वापस लौटना चाहेगा तो उसे पूर्व नोटिस की जरूरत नहीं होगी। धर्म परिवर्तन के बावजूद मूल धर्म की सेवाएं लेने पर संबंधित व्यक्ति को 2 साल 5 साल तक की सजा और 5 हजार रुपए से 1 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
धर्म परिवर्तन की शिकायत मिलने पर सब-इंस्पेक्टर लेवल से नीचे रैंक का पुलिस अधिकारी केस की जांच नहीं कर सकेगा। इससे जुड़ा मुकदमा भी सेशन कोर्ट में ही चल सकेगा।
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