महेंद्र सिंह।
अखण्ड भारत दर्पण।
हिमाचल सेब उत्पादक संघ निरमण्ड ने बुधवार को सेब उत्पादकों की समस्याओं को लेकर तहसीलदार निरमण्ड के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपा। प्रदेश की लगभग 20 प्रतिशत कृषि जनसंख्या उत्पादन करती है व प्रदेश की आर्थिकी में 5000 करोड़ से अधिक का योगदान करती है।
आज यह अर्थव्यवस्था संकट के दौर से गुजर रही है। जहां एक ओर लागत का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ सरकार ने सब्सीडी खत्म कर बागवानों की समस्या को और बढ़ा दिया है।
सेब उत्पादक संघ का कहना है कि बिना सरकार के सहयोग और अनुदान के इस आर्थिकी को बचाना सम्भव नहीं होगा। अतः हम मांग करते हैं कि :-
हिमाचल प्रदेश में भी कश्मीर की तर्ज पर मण्डी मध्यस्थता योजना(MIS) पूर्ण रूप से लागू की
जाए तथा सेब के लिए मण्डी मध्यस्थता योजना(MIS) के तहत । A, B व C ग्रेड के सेब के लिए क्रमशः 60 रुपये, 44 रुपये व 24 रुपये प्रति किलो समर्थन मूल्य पर खरीद की जाए ।
प्रदेश की विपणन मण्डियों में ए.पी.एम.सी कानून को सख्ती से लागू किया जाए। मंडियों में खुली बोली लगाई जाए व किसान से गैर कानूनी रूप से की जा रही मनमानी वसूली जिसमें मनमाने लेबर चार्ज, छूट, बैंक डी डी व अन्य चार्जिज को तुरन्त समाप्त किया जाए व किसानों से प्रदेश में विभिन्न बैरियरों पर ली जा रही मार्किट फीस की वसूली पर तुरन्त रोक लगाई जाए।
जिन किसानों से इस प्रकार की गैर कानूनी वसूली की गई है उन्हें इसे वापिस किया जाए।
किसानों के आढतियों व खरीददारो के पास बकाया पैसों का भुगतान तुरन्त करवाया जाए तथा मंडियों में ए.पी.एम.सी कानून के प्रावधानों के तहत किसानो को जिस दिन उनका उत्पाद बिके उसी दिन उनका भुगतान सुनिश्चित किया जाए। जिन खरीददार व आढतियों ने बकाया भुगतान नहीं किया है उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाए।
अदानी व अन्य कंपनियों के स्टोर में इसके निर्माण के समय शर्तों के अनुसार बागवानो को 25 प्रतिशत सेब रखने के प्रावधान को तुरंत सख्ती से लागू किया जाए।
किसान सहकारी समितियों को स्थानीय स्तर पर स्टोर बनाने के लिए सरकार द्वारा 90 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाए।
सेब की पैकेजिग में इस्तेमाल किए जा रहे कार्टन व ट्रे की मूल्यों में की गई भारी वृद्धि वापिस की जाए।
प्रदेश की सभी मंडियों में सेब वजन के हिसाब से बेचे जाए।
MIS व HPMC द्वारा गत वर्षों में लिए गए सेब का भुगतान तुरन्त किया जाए।
खाद, बीज, कीटनाशक, फफूंदीनाशक व अन्य लागत वस्तुओं पर दी जा रही सब्सिडी को पुनः बहाल किया जाए और सरकार कृषि व बागवानी विभागों के माध्यम से किसानों को उचित गुणवत्ता वाली लागत वस्तुएं सस्ती दरों पर उपलब्ध करवाए।
बागवानी के लिए प्रयोग में आने वाले उपकरणों स्प्रेयर, टिलर, एन्टी हेल नेट आदि की बकाया सब्सिडी तुरन्त प्रदान की जाए।
अतः आप से एक बार पुनः आग्रह है कि बागवानों के संकट को और अधिक बढ़ाने वाली इन समस्याओं के समाधान हेतू सरकार उचित कदम उठाए और इन मांगो का तुरन्त स्वीकार कर सेब उत्पादकों को राहत प्रदान करें।
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