महेंद्र।
विशेष ब्यूरो निरमण्ड।
अखण्ड भारत दर्पण।
हिमाचल दूध उत्पादक संघ के आवाहन पर दूध उत्पादकों की समस्याओं को लेकर वीरवार को निरमण्ड ब्लॉक के टिकरी कैंची में स्थित मिल्क फेडरेशन के चिलिंग प्लांट के बाहर प्रदर्शन किया गया। जिसमें अरसू,बड़ीधार,कोट कोटि,डीम, चायल सराहन और नाेर,रानू पंचायत के सैकड़ों दूध उत्पादको ने भाग लिया।
इस विरोध प्रदर्शन को हिमाचल दूध उत्पादक संघ के राज्य महासचिव देवकी नंद,किसान सभा निरमण्ड ब्लॉक के अध्यक्ष पूर्ण ठाकुर,जगदीश व दूध उत्पादक संघ ब्लॉक सचिव दुर्गानंद ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में दूध उत्पादकों को बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।दूध उत्पादकों को न तो दूध के उचित दाम मिल पा रहे और न ही दूध की पेमेंट समय पर मिल पा रही है। दूध के दाम पानी से भी कम मिल रहा है।कई बार तो दूध की बाल्टियों को भी वापस भेजा जा रहा है। जिसमें की इन परिवारों को अपने परिवार का पालन पोषण करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा दूध उत्पादकों के लिए कोई ठोस नीति नहीं बना रही है। बजट का भी अभाव है जिससे की पेमेंट मिलने का कोई निश्चित समय नहीं है। कई बार तो पेमेंट दो माह बाद ही मिल पाती है।इससे की इन पर दोहरी मार पड़ रही है।उन्होंने कहा कि दूध उत्पादक संघ ने कई बार दुग्ध उत्पादकों की समस्याओं को प्रदेश सरकार के सामने रखा है परंतु प्रदेश सरकार इनकी समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं। जिससे की दूध आज पानी से भी सस्ता बिक रहा है। उन्होंने कहा कि देश व प्रदेश में महंगाई लगातार बढ़ रही है।जिससे कि खाद्य वस्तुओं के अलावा पशुओं को मिलने वाले पशु आहार, फीड व दवाइयों के दाम भी बढ़ रहे। जिससे कि दूध को पैदा करने में लागत भी बढ़ रही है।सरकार की गलत नीतियों के चलते किसानों व पशुपालन घाटे का सौदा बन रहा है।
उन्होंने कहा कि 31 जनवरी को दूध उत्पादक संघ ने प्रदेश सरकार को 8 सूत्रीय मांग पत्र दिया है जिसमें मुख्य रूप से दूध का दाम ₹40 प्रति लीटर दिया जाए,दूध की पेमेंट हर माह 10 तारीख से पहले दी जाए, पशु आहार पर सब्सिडी दी जाए, पशु औषधालय में खाली पद भरे जाएं,मिल्क फेडरेशन के बजट को 50 करोड़ किया जाए। साथ ही सभी सोसाइटी में दूध की गुणवत्ता को मापने के लिए टेस्टिंग मशीन दी जाए।
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