बस गुजरते समय गिरा मलबा, हिमाचल विश्वविद्यालय जाने वाले हजारों छात्र खतरे में — निर्माण गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
📍 शिमला, संवाददाता (अखंड भारत दर्पण):
राजधानी शिमला के बालूगंज क्षेत्र में एक बार फिर सुरक्षा इंतजामों की पोल खुल गई है। शिव बावड़ी लैंडस्लाइड के बाद बनाई गई सुरक्षा दीवार शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे अचानक ढह गई। इस घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह दीवार केंद्रीय लोक निर्माण विभाग द्वारा लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई थी, जिसका निर्माण पिछले वर्ष दिसंबर में ही पूरा हुआ था। लेकिन महज एक साल के भीतर ही इसका गिर जाना सरकारी कार्यों की गुणवत्ता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
🚨 बस गुजरते ही गिरा मलबा, टला बड़ा हादसा
घटना उस समय हुई जब बालूगंज से समरहिल चौक की ओर जा रही एक निजी बस वहां से गुजर रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक दीवार का हिस्सा कमजोर होकर टूट गया और सड़क पर मलबा गिरने लगा। गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने इलाके में दहशत का माहौल बना दिया है।
🎓 छात्रों की सुरक्षा पर मंडराया खतरा
यह मार्ग हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय जाने वाले हजारों छात्रों और कर्मचारियों के लिए मुख्य रास्ता है। वर्तमान में चल रही यूजी परीक्षाओं के बीच इस घटना ने छात्रों की चिंता और बढ़ा दी है। रोजाना बड़ी संख्या में विद्यार्थी इसी रास्ते से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचते हैं, लेकिन अब उन्हें जोखिम उठाकर गुजरना पड़ रहा है।
🗣️ स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि दीवार का निर्माण जल्दबाजी में किया गया और तकनीकी मानकों की अनदेखी हुई। उनका कहना है कि यदि निर्माण सही तरीके से होता, तो इतनी जल्दी दीवार नहीं गिरती। लोगों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और स्थायी समाधान की मांग की है।
🔍 प्रशासन ने कहा—जांच होगी
प्रशासन की ओर से मौके का निरीक्षण किए जाने की बात कही जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जल्द ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
⚠️ 2023 की त्रासदी की यादें ताजा
गौरतलब है कि इसी स्थान पर शिव बावड़ी भूस्खलन 2023 की शुरुआत 14 अगस्त 2023 को हुई थी, जिसमें शिव बावड़ी मंदिर में 20 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। अब एक बार फिर उसी स्थान पर सुरक्षा व्यवस्था की विफलता सामने आई है।
📢 अखंड भारत दर्पण का सवाल:
क्या करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद जनता की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती? आखिर कब तक लापरवाही की कीमत आम लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर चुकानी पड़ेगी?

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