🟨नामकरण संस्कार से जीवन दर्शन तक—कथा के चौथे दिन भक्ति, संस्कृति और नैतिकता का संदेश गूंजा पूरे आनी क्षेत्र में
7 अप्रैल,आनी (कुल्लू)|
डी० पी० रावत: विशेष रिपोर्ट |
आनी उपमंडल के चपोहल गाँव में आयोजित श्रीरामचरितमानस कथा का चौथा दिन भक्ति, आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक चेतना से परिपूर्ण रहा। व्यास आचार्य डॉ. दया नंद गौतम ने अपने ओजस्वी प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को श्रीराम कथा का अमृतपान कराया और जीवन को श्रेष्ठ बनाने का मार्ग बताया।
उन्होंने विशेष रूप से राजा दशरथ के कुलगुरु वशिष्ठ द्वारा श्रीराम के नामकरण संस्कार के महत्व को समझाते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में हर संस्कार का गहरा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक आधार होता है। कथा के माध्यम से उन्होंने यह भी बताया कि भक्ति के मार्ग पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन, परिवार और समाज में शांति स्थापित कर सकता है।
🌼 संस्कारों का महत्व और जीवन दर्शन
व्यास आचार्य ने कहा कि जब महर्षि वशिष्ठ ने भगवान श्रीराम का नामकरण किया, तब उन्होंने ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार नाम का चयन किया, जिससे व्यक्ति के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने बताया कि आज के आधुनिक युग में भी भारतीय परंपराओं और संस्कारों की प्रासंगिकता बनी हुई है।
“संस्कार केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाले आधार स्तंभ हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्ति के जीवन में ग्रहों और नक्षत्रों का प्रभाव अवश्य पड़ता है, लेकिन सच्ची भक्ति और सकारात्मक कर्म से हर कठिनाई को दूर किया जा सकता है।
🕉️ भक्ति से बनता है शांत समाज
कथा के दौरान डॉ. गौतम ने भक्ति की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि जब व्यक्ति भगवान की भक्ति में लीन होता है, तब उसके भीतर के विकार समाप्त होने लगते हैं।
उन्होंने कहा कि आज समाज में बढ़ती अशांति, तनाव और संघर्ष का मुख्य कारण आंतरिक शांति का अभाव है।
“यदि हर व्यक्ति अपने भीतर राम को जागृत कर ले, तो समाज स्वतः ही शांत और समृद्ध बन जाएगा।”
🎶 भजनों से झूम उठा चपोहल
कथा के दौरान भजन गायक लाल सिंह और राकेश शर्मा ने अपने मधुर भजनों से पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
महिलाओं ने भजनों पर झूमकर नृत्य किया, जिससे पूरा पंडाल भक्ति और आनंद से भर गया।
यह दृश्य न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक था, बल्कि ग्रामीण संस्कृति की जीवंतता को भी दर्शाता था।
🎓 मुख्यातिथि का प्रेरणादायक संबोधन
कार्यक्रम में शिक्षाविद डॉ. मुकेश शर्मा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि रामचरितमानस, जिसे महान संत गोस्वामी तुलसीदास ने रचा, भारतीय संस्कृति का अद्भुत ग्रंथ है।
“यह ग्रंथ हमें धर्म, परिवार और समाज के प्रति हमारे कर्तव्यों का बोध कराता है।”
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय में जब व्यक्ति आंतरिक संघर्षों से जूझ रहा है, तब रामकथा उसे सही दिशा दिखाती है।
उन्होंने ‘भीतर की लंका’ (विकारों) का उदाहरण देते हुए कहा कि हर व्यक्ति को अपने अंदर के अहंकार, क्रोध और लोभ से युद्ध करना होगा।
🌟 विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति से बढ़ी गरिमा
इस अवसर पर प्रसिद्ध लेखक, कवि और साहित्यकार दीपक शर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।
विशिष्ट अतिथियों में:
- सेवानिवृत्त CHT सुनंदन शर्मा
- सेवानिवृत्त कानूनगो राजकुमार शर्मा
- साहित्यकार छबिन्द्र शर्मा
आयोजन समिति ने सभी अतिथियों का पारंपरिक टोपी और मफलर पहनाकर भव्य स्वागत किया।
✍️ साहित्यकारों ने दिया संस्कृति संरक्षण का संदेश
लेखक दीपक शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि रामचरितमानस से हमें अनुशासन, संस्कार और जीवन की मर्यादा का पाठ सीखना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं से आह्वान किया कि
वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोकर रखें और आने वाली पीढ़ियों को भी इससे जोड़ें।
“संस्कृति ही हमारी पहचान है, इसे बचाना हम सभी का कर्तव्य है।”
👥 ग्रामीणों की सहभागिता बनी मिसाल
इस आयोजन में चपोहल गाँव सहित आसपास के क्षेत्रों—छई विया—के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
वरिष्ठ नागरिकों में जे आर सरस्वती, नरेश शर्मा, दीन दयाल शर्मा, धर्मेंद्र शर्मा और शेष पाल सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
ग्रामीणों की इस सक्रिय भागीदारी ने यह सिद्ध कर दिया कि आज भी गांवों में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के प्रति गहरी आस्था और एकता बनी हुई है।
🏵️ आयोजन समिति की सराहना
मुख्यातिथि और अन्य वक्ताओं ने आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने और सकारात्मक ऊर्जा फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने चपोहल गाँव और समस्त ग्रामीणों को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी।
📌 निष्कर्ष: रामकथा का जीवन में महत्व
चपोहल गाँव में आयोजित यह श्रीराम कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक सामाजिक और सांस्कृतिक जागरण का माध्यम बनकर उभरी है।
यह कथा हमें यह सिखाती है कि:
- जीवन में धैर्य और नैतिकता का महत्व क्या है
- कठिन परिस्थितियों में भी संयम कैसे बनाए रखें
- परिवार और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को कैसे निभाएं
अंततः, श्रीराम कथा का संदेश स्पष्ट है—
👉 “भक्ति, संस्कार और नैतिकता ही एक श्रेष्ठ जीवन की पहचान है।”







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