24 मार्च,आनी।
डी० पी० रावत।
हिमाचल प्रदेश के आनी क्षेत्र में स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक पहल होने जा रही है। 28 मार्च 2026 को प्रातः 11:00 बजे ग्राम पंचायत बखनाओं स्थित राजा रघुवीर सिंह स्टेडियम (मैदान), आनी में “आयुष ग्राम कार्यक्रम” के अंतर्गत एक भव्य आयुष मेले का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा, बल्कि लोगों को प्राकृतिक और संतुलित जीवनशैली की ओर भी प्रेरित करेगा।
इस आयुष मेले को “हेल्थ महाकुंभ” के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इसमें स्वास्थ्य से जुड़े अनेक आयामों को एक ही मंच पर समाहित किया गया है। कार्यक्रम में निःशुल्क चिकित्सा जांच शिविर, योग शिविर, औषधीय पौधों की प्रदर्शनी, आयुर्वेदिक जीवनशैली पर मार्गदर्शन और दवाइयों का निःशुल्क वितरण जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी।
सबसे खास बात यह है कि इस मेले में आम जनता को किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं देना होगा। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा लोगों के स्वास्थ्य की विस्तृत जांच की जाएगी, जिसमें शुगर, ब्लड प्रेशर (बीपी), हीमोग्लोबिन सहित कई महत्वपूर्ण जांचें शामिल होंगी। इससे क्षेत्र के लोगों को बिना किसी आर्थिक बोझ के स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा।
योग को जीवन का आधार बनाने के उद्देश्य से मेले में विशेष योग शिविर का आयोजन भी किया जाएगा। प्रशिक्षित योग विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान की विधियों का प्रदर्शन किया जाएगा। लोगों को यह बताया जाएगा कि नियमित योगाभ्यास से न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। वर्तमान समय में बढ़ती जीवनशैली संबंधी बीमारियों के बीच योग एक सशक्त समाधान के रूप में उभर रहा है।
इसके साथ ही मेले में औषधीय पौधों की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इस प्रदर्शनी में विभिन्न प्रकार की जड़ी-बूटियों और उनके औषधीय गुणों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। लोगों को यह भी सिखाया जाएगा कि वे अपने घरों में इन पौधों को कैसे उगा सकते हैं और उनका उपयोग दैनिक जीवन में कैसे कर सकते हैं। विशेष रूप से तुलसी, आंवला, गिलोय, अश्वगंधा जैसे पौधों के महत्व पर प्रकाश डाला जाएगा। कार्यक्रम के दौरान इन औषधीय पौधों का निःशुल्क वितरण भी किया जाएगा, जिससे लोग अपने घरों में ही प्राकृतिक उपचार की दिशा में कदम बढ़ा सकें।
आयुष मेले का एक महत्वपूर्ण पहलू आयुर्वेदिक जीवनशैली के प्रति जागरूकता फैलाना है। इस दौरान विशेषज्ञों द्वारा लोगों को ऋतु के अनुसार खान-पान, संतुलित आहार, दिनचर्या (दैनिक रूटीन) और पंचकर्म जैसी प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों के बारे में जानकारी दी जाएगी। यह बताया जाएगा कि किस प्रकार सही दिनचर्या और खान-पान अपनाकर कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।
आज के आधुनिक दौर में जहां लोग तेजी से एलोपैथिक दवाइयों पर निर्भर होते जा रहे हैं, वहीं यह मेला उन्हें आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा की ओर लौटने का संदेश देगा। प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियां न केवल शरीर को रोगों से मुक्त करती हैं, बल्कि दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करती हैं।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आयुष विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों और योजनाओं के बारे में आम जनता को जागरूक करना है। साथ ही लोगों को यह समझाना भी है कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाना ही रोगों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
कार्यक्रम में उपमंडलाधिकारी (नागरिक) आनी, लक्ष्मण सिंह कनैत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे और आयुष मेले का विधिवत शुभारंभ करेंगे। उनके साथ अन्य गणमान्य व्यक्ति, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और क्षेत्र के प्रतिष्ठित नागरिक भी इस अवसर पर मौजूद रहेंगे।
कार्यकारी आयुष उपमंडल चिकित्सा अधिकारी आनी, डॉ. हरीश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि यह मेला क्षेत्र के लोगों के लिए एक सुनहरा अवसर है। उन्होंने कहा कि आयुष विभाग का उद्देश्य केवल उपचार करना नहीं, बल्कि लोगों को स्वस्थ रहने के लिए जागरूक करना भी है। इस मेले के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती बीमारियों का मुख्य कारण असंतुलित जीवनशैली और गलत खान-पान है। यदि लोग समय रहते अपनी आदतों में सुधार कर लें, तो वे कई गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं। आयुष मेला इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस आयोजन को लेकर क्षेत्र में खासा उत्साह देखा जा रहा है। स्थानीय लोग इसे एक बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं, जहां उन्हें एक ही स्थान पर स्वास्थ्य से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सेवाएं और जानकारियां प्राप्त होंगी।
जनता से अपील की गई है कि वे इस आयुष मेले में अधिक से अधिक संख्या में भाग लें और अपने परिवार के साथ इस कार्यक्रम का लाभ उठाएं। विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए यह मेला अत्यंत लाभकारी साबित हो सकता है।
अंततः, यह कहा जा सकता है कि आनी में आयोजित होने वाला यह आयुष मेला केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन की शुरुआत है, जो लोगों को प्राकृतिक, संतुलित और स्वस्थ जीवन की ओर अग्रसर करेगा। यदि इस प्रकार के आयोजन नियमित रूप से होते रहें, तो आने वाले समय में समाज को एक नई दिशा मिल सकती है—जहां लोग बीमारियों से दूर रहकर एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी
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