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    Tuesday, March 24, 2026

    “जल है तो कल है”: करसोग के तुमन स्कूल में गूंजा जल संरक्षण का संदेश, विद्यार्थियों ने लिया हर बूंद बचाने का संकल्प"


    डी० पी० रावत।

    करसोग (मंडी): ऑनलाइन डैस्क।


    (प्रतीकात्मक फोटो)

    शिक्षा खएण्ड करसोग के अंतर्गत आने वाले राजकीय उच्च पाठशाला तुमन में जल संरक्षण विषय पर एक प्रेरणादायक एवं जागरूकता से भरपूर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के मुख्याध्यापक मनोहर लाल भोगल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए जल के महत्व, उसके संरक्षण की आवश्यकता तथा भविष्य की चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें व्यवहारिक जीवन में इसके प्रति जिम्मेदार बनाना था।

    कार्यक्रम की शुरुआत प्रार्थना सभा से हुई, जिसके पश्चात जल संरक्षण विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान विद्यालय परिसर में एक सकारात्मक और जागरूक वातावरण देखने को मिला, जहां विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया।

    मुख्याध्यापक मनोहर लाल भोगल ने अपने संबोधन में कहा कि “जल है तो कल है” केवल एक नारा नहीं, बल्कि मानव जीवन का मूल आधार है। उन्होंने कहा कि जल के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। पृथ्वी पर उपलब्ध जल संसाधन सीमित हैं और जिस गति से उनका दोहन हो रहा है, वह चिंता का विषय है।

    उन्होंने विद्यार्थियों को समझाते हुए कहा कि आज के समय में जल संकट एक वैश्विक समस्या बनता जा रहा है। कई देशों में पीने के पानी की भारी कमी हो चुकी है और भारत के कई हिस्से भी इससे अछूते नहीं हैं। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि हम सभी जल के महत्व को समझें और उसके संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाएं।

    मुख्याध्यापक ने विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में जल के सदुपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं, जैसे कि—

    नल को खुला न छोड़ना

    आवश्यकता के अनुसार ही पानी का उपयोग करना

    ब्रश करते समय नल बंद रखना

    बर्तनों और कपड़ों को धोते समय पानी की बचत करना

    उन्होंने विशेष रूप से वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह एक प्रभावी और सरल उपाय है, जिसके माध्यम से हम बारिश के पानी को संग्रहित कर भविष्य में उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि हर घर और स्कूल में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था की जाए, तो जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि यदि आज हम जल संरक्षण के प्रति सजग नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में जल के लिए संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, यदि वर्तमान में हम इसकी अनदेखी करते रहे।

    कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भी जल संरक्षण विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। कुछ विद्यार्थियों ने भाषण के माध्यम से जल की महत्ता पर प्रकाश डाला, तो कुछ ने कविता और स्लोगन के जरिए संदेश दिया कि “पानी बचाओ, जीवन बचाओ”। इस दौरान विद्यार्थियों की रचनात्मकता और जागरूकता देखने लायक थी।

    विद्यालय के शिक्षकों ने भी इस अवसर पर विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जल संरक्षण केवल एक विषय नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी समाज के भविष्य हैं और यदि वे आज से ही इस दिशा में कदम उठाएंगे, तो निश्चित रूप से एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

    कार्यक्रम के अंत में मुख्याध्यापक ने विद्यार्थियों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई। सभी विद्यार्थियों ने मिलकर यह संकल्प लिया कि वे न केवल स्वयं जल की बचत करेंगे, बल्कि अपने परिवार और समाज को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे।

    इस आयोजन का प्रभाव यह रहा कि विद्यार्थियों में जल संरक्षण के प्रति एक नई ऊर्जा और जिम्मेदारी का भाव देखने को मिला। उन्होंने यह समझा कि जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन की आधारशिला है, जिसकी रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है।

    एम लोकल कमेटी आनी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को स्थानीय स्तर पर भी सराहना मिली। कमेटी के सदस्यों ने विद्यालय प्रशासन और विद्यार्थियों के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    अंत में यह कहा जा सकता है कि राजकीय उच्च पाठशाला तुमन में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि एक जागरूकता अभियान के रूप में सामने आया, जिसने विद्यार्थियों के मन में जल संरक्षण के प्रति गहरी समझ और जिम्मेदारी का बीज बोया।

    आज के समय में जब जल संकट एक गंभीर वैश्विक चुनौती बन चुका है, ऐसे में इस प्रकार के प्रयास न केवल सराहनीय हैं, बल्कि अत्यंत आवश्यक भी हैं। यदि समाज का हर वर्ग इस दिशा में एकजुट होकर कार्य करे, तो निश्चित रूप से जल संकट जैसी समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

    “जल बचाओ, भविष्य बचाओ”—इसी संदेश के साथ यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और विद्यार्थियों को एक नई सोच और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली।