जिला कुल्लू की खराहल घाटी में प्रस्तावित बिजली महादेव रोपवे परियोजना का विरोध अब और तेज हो गया है। वीरवार को धारठ कटान स्थल पर ग्रामीणों ने एकजुट होकर पेड़ों की कटाई रोक दी और रोपवे निर्माण के विरोध में जोरदार धरना दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि यह परियोजना क्षेत्र की हरियाली, आस्था और पर्यावरण के लिए खतरा बन चुकी है। रामशिला में पहले से चल रहे विरोध के बावजूद प्रशासन की चुप्पी से नाराज़ ग्रामीण अब सीधे कटान स्थल पर जाकर आंदोलन कर रहे हैं।
धरना स्थल पर एचपीएमसी के पूर्व उपाध्यक्ष एवं भाजपा के पूर्व नेता राम सिंह भी मौजूद रहे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा,
> "जब क्षेत्र की जनता और देवता स्वयं इस रोपवे के खिलाफ हैं, तो सरकार आखिर किसके इशारे पर इस परियोजना को आगे बढ़ा रही है?"
राम सिंह ने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों की भावनाओं और देव आस्था को सरकार नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि रोपवे कार्य और पेड़ों का कटान तुरंत नहीं रोका गया, तो आने वाले दिनों में खराहल घाटी से लेकर पूरे कुल्लू में व्यापक जन आंदोलन खड़ा होगा।
धरना स्थल पर वन विभाग के कर्मचारियों और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। स्थानीय लोग न सिर्फ पेड़ों के कटान को रोकना चाहते हैं, बल्कि पूरी परियोजना को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
क्या है ग्रामीणों की प्रमुख मांगें?
रोपवे निर्माण कार्य को तुरंत रोका जाए
जंगलों में पेड़ों का कटान तत्काल प्रभाव से बंद हो
जनता की भावनाओं और देव आस्था का सम्मान किया जाए
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है – क्या विकास परियोजनाएं स्थानीय जनता की सहमति और संस्कृति को दरकिनार कर चलाई जाएंगी?
सरकार और प्रशासन की ओर से इस पर अब तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन ग्रामीणों की चेतावनी है कि अगर जल्द कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो कुल्लू की सड़कों पर जनविरोध साफ दिखाई देगा।
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