राजस्व विभाग ने दी वन भूमि, अब सरकार लेगी वापस
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनी SIT, हर जिले में होगी जांच
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर बड़ा कदम उठाते हुए सभी जिलों में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) के गठन के आदेश जारी किए हैं। ये टीमें हर जिले में उस वन भूमि का पता लगाएंगी, जिसे अतीत में राजस्व विभाग ने अन्य प्रयोजनों के लिए आवंटित कर दिया था।
1980 से पहले कई जमीनें बिना मंजूरी बंटी थीं
1980 में फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट (FCA) लागू होने के बाद से वन भूमि केवल FCA की मंजूरी के बाद ही दी जा सकती थी। लेकिन उससे पहले कई बार राजस्व विभाग ने अपने स्तर पर वन भूमि का आबंटन कर दिया — चाहे वह किसी प्रोजेक्ट के लिए हो या पुनर्वास के लिए।
सूत्रों का कहना है कि तिब्बती समुदाय को बसाने के दौरान भी कुछ ऐसी ही जमीनें दी गई थीं।
अब जो वन भूमि गैर-वन उपयोग में है, वह होगी वापस
सरकार की ओर से जारी आदेशों में साफ कहा गया है कि ऐसी तमाम जमीनें जिनका उपयोग वनीकरण के अलावा अन्य कार्यों में हो रहा है, उन्हें वन विभाग को वापस लौटाया जाएगा।
यदि कहीं जनहित से जुड़ा मामला हुआ, और जमीन को वापस लेना संभव न हो, तो जमीन की वर्तमान वैल्यू के अनुसार राशि वसूल की जाएगी। यह रकम केवल वन विकास पर खर्च होगी।
हर जिले में ये अधिकारी करेंगे जांच
राज्य सरकार द्वारा गठित SIT में शामिल होंगे:
उपायुक्त (DC) – अध्यक्ष
जिला राजस्व अधिकारी (DRO) – सदस्य सचिव
डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) – सदस्य
यह टीम संयुक्त रूप से हर उस केस की गहन पड़ताल करेगी, जिसमें राजस्व विभाग द्वारा वन भूमि का आबंटन किया गया है।
वन भूमि का इस्तेमाल केवल वनीकरण के लिए होगा
सरकार ने साफ कहा है कि भविष्य में वन भूमि का उपयोग केवल वनीकरण के लिए ही किया जाएगा। इससे इतर किसी कार्य के लिए भूमि का प्रयोग नहीं होगा।
गोडवर्मा केस बना कार्रवाई की वजह
सुप्रीम कोर्ट ने गोडवर्मा बनाम भारत सरकार केस में दिए गए फैसले के तहत ही यह सख्त कार्रवाई शुरू की है। अब राज्य सरकार वन भूमि पर हुए सभी अनियमित आवंटनों की गहराई से जांच कर रही है।
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