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Underwriting(अंडरराइटिंग): क्या है?

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 अंडरराइटिंग का क्या अर्थ है?


Underwriting क्या है?
अंडरराइटिंग एक व्यक्ति या संस्थान को फीस के लिए वित्तीय जोखिम लेना है। यह खतरा अक्सर लोन, इंश्योरेंस या निवेश में होता है। आज की वित्तीय दुनिया में अंडरराइटिंग बहुत महत्वपूर्ण है। अंडरराइटिंग लोन्स के लिए उचित बॉरोइंग रेट निर्धारित करने, उचित प्रीमियम्स निर्धारित करने और सिक्योरिटीज के लिए मार्केट क्रिएट करने में मदद करती है।

अंडरराइटिंग सुनिश्चित करती है कि आईपीओ फाइल करने वाली कंपनी आवश्यक धन जुटाए और अंडरराइटर्स को उनकी सेवाओं के लिए प्रीमियम या मुनाफा दे।

 तीन प्रकार के अंडरराइटिंग हैं: 

1.लोन

2.इंश्योरेंस 

3.सिक्योरिटीज। 

एक अंडरराइटर का प्रमुख कार्य वित्तीय ट्रांजेक्शंस के लिए एक उचित और स्थिर मार्केट बनाना होता है।


अंडरराइटिंग कैसे काम करती है?

अंडरराइटिंग में जोखिम का अनुमान लगाने के लिए अनुसंधान शामिल है। इससे लोन्स के लिए उचित बॉरोइंग रेट निर्धारित करने में मदद मिलती है, पॉलिसीहोल्डर्स को इन्श्योर करने की वास्तविक लागत (True Cost) को पर्याप्त रूप से कवर करने के लिए उचित प्रीमियम्स बनाने में मदद मिलती है और सिक्योरिटीज के लिए मार्केट बनाने में मदद मिलती है। अंडरराइटर कवरेज से मना कर सकता है अगर जोखिम बहुत अधिक लगता है।

जोखिम के मुख्य कारक

सभी अंडराइटिंग में जोखिम प्रमुख फैक्टर है। लोन के मामले में यह जोखिम रहता है कि कहीं लोन लेने वाला लोन नहीं चुकाएगा। इंश्योरेंस के मामले में कहीं ऐसा न हो कि कई बाहरी पॉलिसीधारक क्लेम फाइल कर दें। सिक्योरिटीज में जोखिम रहता है कि अंडररिटन इन्वेस्टमेंट मुनाफा नहीं देंगे। अंडरराइटिंग (Underwriting Securities) अक्सर आईपीओ के माध्यम से होती है।

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