हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने पिछले दिनों यूजी प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम घोषित किए हैं। जिससे पूरे प्रदेश भर के हजारों छात्रों को आघात पहुंचा है। प्रदेश के सभी महाविद्यालय में 10% से 15% विद्यार्थी ही परीक्षा में उत्तीर्ण हो पाए है। जिन छात्रों ने 12वीं के परीक्षा में 90% व 95% अंक लेकर परीक्षा पास की है वह छात्र आज प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा निकाले गए परीक्षा परिणामों में फेल हुआ है। उन छात्रों के किसी के पांच नंबर तो किसी के 10 नंबर परीक्षा परिणाम में आए हैं।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय एनएसयूआई के अध्यक्ष रजत भारद्वाज ने प्रदेश विश्वविद्यालय की परीक्षा परिणाम चेकिंग प्रणाली पर सवालिया निशान उठाए हैं। जिस तरीके से विश्वविद्यालय प्रशासन ऑनलाइन स्कैनिंग के माध्यम से पेपर चेक कर रही है। वह कहीं न कहीं छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। इस प्रणाली में विश्वविद्यालय प्रशासन पहले पेपरों को स्कैन करती है उसके बाद एक पीडीएफ के रूप में उसे ऑनलाइन ही किसी प्रोफेसर को चेकिंग के लिए भेज दिया जाता है। जिसमें की कई बार आंसर शीट के कई पेज स्कैनिंग न होने से छूट जाते हैं। और आधे अधूरे आंसर शीट ही प्रोफेसर के पास जाती है।
भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय मांग करता है कि प्रदेश के हजारों छात्रों के साथ प्रदेश विश्वविद्यालय खिलवाड़ करना बंद करें और जो यह परीक्षा परिणाम विश्वविद्यालय ने घोषित किए हैं। इन परीक्षा परिणामों पर पुनर्विचार हो और हजारों छात्रों के भविष्य को अधर में लटकने से बचाएं एनएसयूआई मांग करती है कि पेपरों को दुबारा चेकिंग के लिए भेजा जाए।
विश्वविद्यालय प्रशासन अगर तत्काल प्रभाव से इस मुद्दे पर विचार नहीं करेगी तो भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन छात्र हितों को लेकर पूरे प्रदेश भर के कॉलेजों में धरना प्रदर्शन करेगी।
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