केंद्र सरकार द्वारा किसानों से किए गए वायदों से पीछे हटने के विरोध में और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, किसानों की संपूर्ण कर्ज़ मुक्ति के समर्थन में 26 नवम्बर को संयुक्त किसान मोर्चा, हि.प्र राजभवन मार्च करेगा और राज्यपाल की मार्फत राष्ट्रपति को ज्ञापन देगा। इसके साथ-साथ हिमाचल प्रदेश की किसानी और बागवानी की समस्याओं से भी राज्यपाल को अवगत करवाया जाएगा।
संविधान दिवस के अवसर पर देश भर के किसान अपने-अपने राज्यों के राज्यपालों के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा किसानों से किए गए वायदे याद दिलाएंगें। सनद रहे कि राष्ट्रीय स्तर पर किसानों के आन्दोलन के बाद केन्द्र सरकार ने तीन कृषि कानूनों को वापिस लिया था। किसानों ने आन्दोलन खत्म करने के लिए अपनी मांगें रखी थीं जिन्हें पूरा करने के लिए केन्द्र सरकार ने अपनी सहमति जताई थी। परन्तु आन्दोलन समाप्त होने के लगभग एक साल बाद भी केन्द्र सरकार ने उस पर कोई कार्यवाही नहीं की।
पिछले वर्ष 21 नवंबर 2021 को केंद्र सरकार को लिखे पत्र में संयुक्त किसान मोर्चा ने अपने 6 लंबित मुद्दों की तरफ सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। इसके जवाब में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव ने 9 दिसंबर 2021 को संयुक्त किसान मोर्चा के नाम एक पत्र लिखकर कई मुद्दों पर सरकार की ओर से आश्वासन दिया और आंदोलन को वापस लेने का आग्रह किया था। सरकार के इस पत्र पर भरोसा कर संयुक्त किसान मोर्चा ने दिल्ली की सीमा पर लगे मोर्चा और तमाम धरना प्रदर्शनों को 11 दिसंबर 2021 को उठा लेने का निर्णय किया था। केन्द्र की इस वादाखिलाफी से किसान संगठनों में भारी रोष है। संयुक्त किसान मोर्चा अपने आन्दोलन के दूसरे चरण की तैयारी कर रहा है।
ज्ञापन में मांगें
1. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के आधार पर सभी फसलों के लिए सी2+50 फीसदी के फार्मूला से एम.एस.पी. की गारंटी का कानून बनाया जाए। केन्द्र सरकार द्वारा एम.एस.पी. पर गठित समिति व उसका घोषित एजेंडा किसानों द्वारा प्रस्तुत मांगों के विपरीत है। इस समिति को रद्द कर, एम.एस.पी. पर सभी फसलों की कानूनी गारंटी के लिए किसानों के उचित प्रतिनिधित्व के साथ, केंद्र सरकार के वादे के अनुसार एस.के.एम. के प्रतिनिधियों को शामिल कर, एम.एस.पी. पर एक नई समिति का पुनर्गठन किया जाए।
2. खेती में बढ़ रहे लागत के दाम और फसलों का लाभकारी मूल्य नहीं मिलने के कारण 80 फीसदी से अधिक किसान भारी कर्ज में फंस गए हैं और आत्महत्या करने को मजबूर हैं। ऐसे में सभी किसानों के सभी प्रकार के कर्ज माफ किए जाएं।
3. बिजली संशोधन विधेयक, 2022 को वापस लिया जाए। केंद्र सरकार ने 9 दिसंबर 2021 को संयुक्त किसान मोर्चा को लिखे पत्र में यह लिखित आश्वासन दिया था कि, “मोर्चा से चर्चा होने के बाद ही बिल संसद में पेश किया जाएगा।” इसके बावजूद, केंद्र सरकार ने बिना कोई विमर्श के यह विधेयक संसद में पेश किया।
4. (1) लखीमपुर खीरी जिला के तिकोनिया में चार किसानों और एक पत्रकार की हत्या के मुख्य साजिशकर्ता केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी को मंत्रिमण्डल से बर्खास्त किया जाए और गिरफ्तार करके जेल भेजा जाए।
(2) लखीमपुर खीरी हत्याकांड में जो निर्दोष किसान जेल में कैद हैं, उनको तुरन्त रिहा किया जाए और उनके ऊपर दर्ज फर्जी मामले तुरन्त वापस लिए जाएं। शहीद किसान परिवारों एवं घायल किसानों को मुआवजा देने का सरकार अपना वादा पूरा करे।
5. सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, फसल संबंधी बीमारी, आदि तमाम कारणों से होने वाले नुकसान की पूर्ति के लिए सरकार सभी फसलों के लिए व्यापक एवं प्रभावी फसल बीमा लागू करे।
6. सभी मध्यम, छोटे और सीमांत किसानों और कृषि श्रमिकों को 5000 प्रति माह की किसान पेंशन की योजना लागू की जाए।
7. किसान आन्दोलन के दौरान भाजपा शासित प्रदेशों व अन्य राज्यों में किसानों के ऊपर जो फर्जी मुकदमे लादे गए हैं, उन्हें तुरंत वापस लिया जाए।
8. किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए सभी किसानों के परिवारों को मुआवजे का भुगतान और उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाए, और शहीद किसानों के लिए सिंघु मोर्चा पर स्मारक बनाने के लिए भूमि का आवंटन किया जाए।
संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि ज्ञापन के जरिए देश का अन्नदाता सरकार तक अपना गुस्सा प्रेषित करना चाहता है। मोर्चा ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि वह केंद्र सरकार को उसके लिखित वायदों की याद दिलाएं और देश के किसानों के संपूर्ण कर्ज मुक्ति, किसान बीमा और किसान पेंशन की मांगों को जल्द से जल्द पूरा करवाएं।
संयुक्त किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति के मार्फ़त केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि वह किसानों के धैर्य की परीक्षा लेना बंद करे। संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि सरकार अपने वादे और किसानों के प्रति जिम्मेदारी से मुकरना जारी रखती है तो किसानों के पास आंदोलन को तेज करने के सिवाय और कोई रास्ता नहीं बचेगा।
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