डी पी रावत
अखण्ड भारत दर्पण न्यूज
केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार नए श्रम कानूनों के विरोध में 19 दिसंबर 2025 को हिमाचल प्रदेश के सभी जिला व उपमंडल मुख्यालयों में व्यापक धरना-प्रदर्शन किए जाएंगे। सीटू (CITU) राज्य कमेटी के आह्वान पर हमीरपुर जिला मुख्यालय के साथ-साथ आनी उपमंडल में भी जोरदार विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
सीटू के जिला सचिव एवं संयोजक आनी पदम प्रभाकर ने बताया कि आनी में मजदूर वर्ग इन काले, मजदूर-विरोधी लेबर कोड्स के खिलाफ सड़कों पर उतरेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा की मोदी सरकार की नीतियां पूरी तरह मजदूर विरोधी हैं और स्थायी रोजगार को खत्म कर कच्चे, अस्थायी व ठेका आधारित रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सीटू के राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर सिंह ठाकुर ने कहा कि 21 नवंबर 2025 को केंद्र सरकार ने 44 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर चार नए श्रम कानून लागू किए, जो मजदूरों के यूनियन बनाने, धरना-प्रदर्शन और हड़ताल जैसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला हैं। नए कानूनों से स्थायी रोजगार लगभग समाप्त हो जाएगा और फिक्स्ड टर्म, अप्रेंटिस, ट्रेनी, ठेका व आउटसोर्सिंग को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन कानूनों से ठेकेदारों को मजदूरों के शोषण की खुली छूट दी गई है। 50 मजदूर रखने पर लेबर लाइसेंस की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है, जिससे न्यूनतम वेतन, ईपीएफ, ईएसआई और मातृत्व लाभ जैसे अधिकारों पर सीधा असर पड़ेगा। वहीं ‘हायर एंड फायर’ नीति लागू कर उद्योगपतियों को छंटनी और कारखाने बंद करने की खुली छूट दे दी गई है।
सीटू नेताओं ने कहा कि श्रम विभाग और श्रम न्यायालयों को कमजोर कर दिया गया है, जिससे मजदूरों को न्याय मिलना मुश्किल होगा। 20 से कम मजदूरों वाले उद्योगों में अधिकांश श्रम कानून लागू न होने से देश में “जंगलराज” जैसी स्थिति बनेगी।
सीटू राज्य कमेटी ने केंद्र सरकार से चारों श्रम कानूनों को तुरंत वापस लेने की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि सरकार ने इन्हें वापस नहीं लिया तो आंदोलन और अधिक व्यापक व उग्र रूप लेगा।
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