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PGI रोहतक के डॉक्टर पर छात्रा के अपहरण और शारीरिक शोषण का आरोप, पुलिस पर लापरवाही का आरोप

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 PGI रोहतक के डॉक्टर पर छात्रा के अपहरण और शारीरिक शोषण का आरोप, पुलिस पर लापरवाही का आरोप


रोहतक: हरियाणा के रोहतक स्थित पीजीआई मेडिकल कॉलेज में एक shocking घटना सामने आई है, जिसने पूरे कॉलेज और समाज को हिला दिया है। बीडीएस फर्स्ट ईयर की छात्रा प्राची ने एक वरिष्ठ डॉक्टर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप के मुताबिक, डॉक्टर ने छात्रा का अपहरण कर उसके साथ शारीरिक शोषण किया और पुलिस ने इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

घटना की विस्तृत जानकारी

प्राची, जो पीजीआई रोहतक में बीडीएस फर्स्ट ईयर की छात्रा है, ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म इंस्टाग्राम के माध्यम से अपनी आपबीती साझा की। उसने बताया कि पिछले सात महीनों से पीजी एनाटॉमी के वरिष्ठ डॉक्टर, डॉ. मनिंदर कौशिक, उसका पीछा कर रहे थे। प्राची का कहना है कि शुरुआत में यह सब एक दोस्त के रूप में हुआ, लेकिन धीरे-धीरे यह स्थिति भयावह होती चली गई।

डॉ. मनिंदर कौशिक ने प्राची पर लगातार दबाव डाला और जब उसने इनकार किया तो वह हिंसक हो गए। प्राची ने बताया कि दो महीने पहले से वह लगातार डर में जी रही है क्योंकि डॉक्टर उसे ब्लैकमेल कर रहे थे और धमकियाँ दे रहे थे। आरोप के अनुसार, डॉक्टर ने उसे धमकी दी कि अगर वह उसके प्रस्ताव को मानने से इनकार करेगी तो उसे एनाटॉमी में फेल करवा देंगे और उसका एडमिट कार्ड भी रोक देंगे।

16 अगस्त को, डॉ. मनिंदर ने प्राची को फोन कर लाइब्रेरी के बाहर बुलाया और वादा किया कि वह उसे परेशान करना बंद कर देगा और एडमिट कार्ड भी दे देगा। हालांकि, इस मुलाकात ने प्राची के लिए एक और खतरनाक मोड़ ले लिया।

डॉक्टर ने उसे अपनी कार में जबरदस्ती बिठाया और एक अज्ञात स्थान पर ले गया। वहां, 16 अगस्त की रात 11 बजे से लेकर 17 अगस्त की दोपहर 1 बजे तक, लगभग 12 घंटे तक, उसने प्राची के साथ अत्यधिक शारीरिक और भावनात्मक शोषण किया। 

प्राची ने आरोप लगाया कि डॉक्टर ने उसे लात मारी, मुक्का मारा, और चाकू से प्रताड़ित किया, जिससे उसके चेहरे और शरीर पर कई निशान पड़ गए। अंततः उसे वापस कॉलेज कैंपस में छोड़ दिया गया, जहां उसने तुरंत अपने माता-पिता को सूचित किया और शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस की लापरवाही और छात्रा की मांग

प्राची ने यह भी आरोप लगाया कि उसके शिकायत दर्ज कराने के बावजूद पुलिस ने कोई गंभीर कार्रवाई नहीं की। उसने यह सवाल उठाया कि एक ऐसे व्यक्ति को, जो इस तरह के कृत्यों में संलिप्त है, मेडिकल कॉलेज में प्रवेश की अनुमति कैसे दी जा सकती है।

प्राची ने सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट में लिखा, "मैंने जो कुछ सहा है उसके लिए मैं न्याय चाहती हूं और मैं यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हूं कि किसी और को भी इस तरह की पीड़ा न झेलनी पड़े।"

प्रतिक्रियाएँ और सामाजिक प्रतिक्रिया

प्राची के पोस्ट के वायरल होने के बाद, सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर व्यापक बहस शुरू हो गई है। कई लोगों ने इस घटना की निंदा की और आरोपित डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और अधिकार संगठनों ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है और दोषियों को सजा देने की अपील की है। उन्होंने यह भी कहा है कि इस घटना के माध्यम से मेडिकल कॉलेज और पुलिस प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, जिन्होंने इस गंभीर मामले में लापरवाही बरती।

प्रबंधन और प्रशासन की भूमिका

इस मामले में पीजीआई रोहतक और स्थानीय पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। कई लोगों ने आरोप लगाया है कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने में ढिलाई बरती और इस मामले को हल्के में लिया।

मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और आरोपी डॉक्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। हालांकि, अभी तक इस मामले में पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे पीड़िता और उसके समर्थकों में आक्रोश फैल गया है।

महिलाओं के प्रति हिंसा और शोषण की गंभीरता

प्राची की इस घटना ने न केवल पीजीआई रोहतक बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। यह मामला महिलाओं के प्रति हिंसा और शोषण की गंभीरता को उजागर करता है और इस बात की आवश्यकता को भी दर्शाता है कि पुलिस और प्रशासन को ऐसे मामलों में गंभीरता से और तेजी से कार्रवाई करनी चाहिए।

प्राची ने न्याय की मांग की है और यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है कि भविष्य में किसी अन्य महिला को इस प्रकार की पीड़ा का सामना न करना पड़े। इस मामले के प्रति लोगों की जागरूकता और संवेदनशीलता इस बात को साबित करती है कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

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