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    Saturday, July 27, 2024

    Jammu & Kashmir Encounter: कुपवाड़ा में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़, एक आतंकी ढेर, दो जवान घायल

    Jammu & Kashmir Encounter: कुपवाड़ा में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़, एक आतंकी ढेर, दो जवान घायल



    शनिवार को सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हुई। जिसमें एक आंतकी ढेर हुआ है और वहीं दो जवान घायल हो गए हैं।

    जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा सुरक्षाबलों ने घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया है। सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में एक आतंकी मारा गया है और दो जवानों के घायल होने की सूचना मिली है। कुपवाड़ा के माछिल क्षेत्र में सेना ने घुसपैठ की कोशिश को नाकाम किया है।



    भारतीय सेना के चिनार कॉर्प्स ने जानकारी देते हुए बताया कि नियंत्रण रेखा पर माछिल सेक्टर के कामकारी में एक चौकी पर अज्ञात लोगों ने फायरिंग कर दी। जिसमें हमारे दो सैनिक घायल हुए हैं और उन्हें निकाल लिया गया है।
    जम्मू में बढ़ती आतंकी वारदातें
    वर्ष 2008 के बाद एक बार फिर लगातार आतंकी वारदातों से लोग डरे और चिंतित हैं। पिछले 46 दिन से सात आतंकी वारदातों में 11 सैन्य जवान बलिदान हो चुके हैं और 10 आम नागरिकों की मौत हो गई। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अब इस पर निर्णायक रणनीति का समय आ चुका है। हर बार आतंकी हमला कर गायब हो गए। इन आतंकियों की जंगलों में अब भी मौजूदगी लोगों को परेशान कर रही है। 

    सेना के पूर्व कर्नल सुशील पठानिया का कहना है कि बीहड़ और कठिन इलाकों में जल्दबाजी में आतंकवादियों का पीछा करने से हमारे सैनिकों को हाईनि हो रही है। जिन इलाकों में आतंकवादियों के होने की सूचना है। यहां वहां ग्रेनेड, मोर्टार और गनशिप हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करके उन्हें मार गिराया जाना चाहिए। इस रणनीति का इस्तेमाल पहले भी किया जा चुका है और इसके बहुत अच्छे परिणाम मिले हैं। 

    पूर्व डीजीपी एसपी वेद कहते हैं कि पहले भी आतंकी वारदातें होती थीं। तब आतंकी फिदायीन के रूप में आते थे। हमला कर सात आठ लोगों को मारा और खुद भी मर गए। लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा। वह मारने से पहले भागने का रास्ता तय कारते हैं। ताकि एक हमला करने के बाद फिर से हमला कर सकें। यह आतंकियों की नई रणनीति है। वह अब फिदायीन बनकर नहीं आते। वह अपने लिए ठिकाना बनाते हैं।

     फिर घात लगाकर हमला करते हैं। हमला कर भाग जाते हैं। वह जंगल, पहाड़ और युद्ध में लड़ने का प्रशिक्षण लेकर आए हैं। इन तक पहुंचने के लिए ठोस रणनीति बनानी पड़ेगी। पूर्व कर्नल सुशील पठानिया कहते हैं कि सुरक्षा बलों को आतंकवाद विरोधी अभियान चलाते समय सेक्शन और प्लाटून अभ्यास पर ही टिके रहना चाहिए।

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