जिन्होंने स्वयं परहित हेतु अपने जीवन के सुखों का त्याग कर दिया और मानव के आगे एक प्रेरणा स्रोत बन गए । समाज में आवश्यकता है कि मानव इन महान विभूतियों को आदर्श बना कर इनसे शिक्षा ग्रहण करें । क्योंकि आज घोर कलिकाल के प्रभाव के कारण प्रेम भावनाओं व संवेधनायों से रहित मानव का हृदय शुष्क हो चुका है। आपाधापी भरे जीवन में सभी केवल अपने लिए जीते हैं। लेकिन शास्त्र कहते हैं कि मानव तो वो है जो औरों के लिए जिए अपने दुख में तो सभी ग़मगीन हो ही जाते हैं लेकिन सच्चा मानव तो वो है दूसरों के दुख देखकर द्रवित हो उठे उसी हृदय में राम का आगमन होता है।
जिला ऊना के अंर्तगत उपमंडल हरोली क्षेत्र के गांव टहलीवाल में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आश्रम में राम प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमे सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी उपमा भारती जी ने प्रभु श्री राम जी के प्राण प्रतिष्टा के पावन अवसर पर प्रभु के त्यागी जीवन का वर्णन किया। उन्होंने ने अपने प्रवचनों में कहा के ईश्वर के सभी अवतारों या ऋषियों मनीषियों ने यू तो अनेकों महान कार्य किए, लेकिन अगर उनके कार्यों में साम्य देखा जाए तो सभी ने स्वयं साधनस्थ रह कर परमार्थ किया, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी ने कंटकाकीर्ण वन पथ का चयन इस लिए किया किया ताकि अधर्म का समूल नाश कर सभी के जीवन में सुख व समृद्धि के पुष्प खिलाये जाएं। भूतभावन भगवान भोलेनाथ ने जन- जन के रक्षण हेतु सागर से निकले विष को कंठस्थ कर लिया,कहीं कहीं विवेकानंद तो कहीं रामतीर्थ जी, कहीं वर्धमान तो कहीं राजा शिबि कहीं दधीचि ऋषि तो कहीं भर्तिहरि जी इसी परकल्याण रूपी माणिका के उज्ज्वल मोती हैं।
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