मानसिक दृढ़ता और नैतिक श्रेष्ठता सुदृढ़ नेतृत्व के अनिवार्य गुण हैं। प्रकृति ने ये गुण महिलाओं को सहज ही उपलब्ध कराए हैं। आवश्यकता महिलाओं के इन नैसर्गिक (स्वाभाविक)गुणों को परिष्कृत (तराश) कर समुदाय को एक ऐसा सर्वगुणसंपन्न नेतृत्व प्रदान करने की है जो नई चुनौतियां और संभावनाओं को अवसरों में बदलने की क्षमता रखता हो। उक्त विचार सीडीपीओ सुजानपुर कुलदीप सिंह चौहान ने ग्राम पंचायत जंगल एवं ग्राम पंचायत पटलांदर में 'सशक्त महिला योजना' एवं ' वो दिन योजना' के अंतर्गत आयोजित पंचायत स्तरीय जनसंवाद के प्रथम दौर के कार्यक्रमों में जनसमुदाय से संवाद करते हुए कही। उन्होंने कहा कि आज हमारे पास दुनिया का सर्वाधिक युवा और प्रतिभावान मानव संसाधन (ह्यूमन रिसोर्स)है। स्थानीय स्तर पर ऐसे सामुदायिक नेतृत्व की देश को आवश्यकता है जो बिना लैंगिक पूर्वाग्रह के इस प्रतिभावान मानव संसाधन की प्रतिभा को परिष्कृत(तराश)कर उसे प्रतिस्पर्धी विश्व की आवश्यकता के अनुसार ढाल सके और ग्रामीण क्षेत्रों को आर्थिक शक्ति के केंद्रों के रूप में विकसित कर सके।
उन्होंने कहा कि आर्थिक शक्ति प्रतिस्पर्धा से, प्रतिस्पर्धा ज्ञान से और ज्ञान सूचनाओं के आदान-प्रदान से समृद्ध होता है। सूचनाओं से प्रौद्योगिकी, प्रौद्योगिकी से व्यवसाय, व्यवसाय से प्रबंधन और प्रबंधन से नेतृत्व को शक्ति मिलती है। महिला एवं बाल विकास विभाग की अगुवाई में समस्त विभागों के एकीकृत (सांझा) जनसंवाद का उद्देश्य सूचनाओं के आदान-प्रदान से स्थानीय ज्ञान और प्रबंधन कौशल(मैनेजमेंट स्किल्स) का परिमार्जन कर इसी कड़ी का विकास और विस्तार करना है ताकि वे नये नेतृत्व, नई उद्यमिता, नए व्यवसायों और नई संभावनाओं को जन्म दें। उन्होंने महिलाओं से आगे आने, समुदाय को नेतृत्व प्रदान करने, बालिकाओं के संरक्षण और उनके कौशल विकास की बागडोर को अपने हाथ में लेने का अनुरोध किया। इस अवसर पर मॉडल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जंगल बैरी से डॉ सुरेंद्र डोगरा ने ग्राम पंचायत जंगल में तथा डॉक्टर रुचिका ने ग्राम पंचायत पटलांदर में महिलाओं को पोषण, एनीमिया और माहवारी प्रबंधन पर चिकित्सीय परामर्श एवं नवीनतम जानकारी दी। उन्होंने किशोरावस्था पोषण, उनके शारीरिक और ज्ञानात्मक विकास तथा संक्रमणों के विरुद्ध प्रतिरोधात्मक शक्ति में वृद्धि के लिए किए जाने वाले उपायों पर जनसमुदाय को जागृत करने के साथ-साथ समुदाय की समरसता (संतुलन) को बनाए रखने वाले उपायों जैसे पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट पर लोगों को जानकारी दी। मनोविज्ञानी शीतल वर्मा ने मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, चिंता विकार (एनैग्जाईटी डिसऑर्डर), अटेंशन डेफिसिट, अवसाद, और मादक पदार्थों (ड्रग एडिक्शन) पर महिलाओं को जानकारी दी व इन से निजात पाने के लिए रिलैक्सेशन टेक्निक्स का अभ्यास कराया। उन्होंने परिवारों को बच्चों की प्रति मित्रवत व्यवहार अपनाने की सलाह दी ताकि वे अपने मन में चल रही उथल-पुथल को उनसे सांझा करें और मादक पदार्थों की ओर रुख न करें। कृषि विभाग से विषयवाद विशेषज्ञ (सब्जेक्ट मैटर स्पेशलिस्ट) राजेश कुमार ने प्रगतिवाद कृषि तथा कृषि क्षेत्र के उत्थान के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। संवेदना डिवेलपमेंटल सोसाइटी की ओर से जिला प्रमुख सिंपल कुमारी ने महिलाओं को माहवारी प्रबंधन में सुरक्षित सामग्री यथा बायोडिग्रेडेबल सेनेटरी पैड्स बारे बताया तथा उनके निष्पादन (डिस्पोजल)की विधियों की भी जानकारी दी। उन्होंने इस अवसर पर ऐसे सेनेटरी पैडस का वितरण भी किया।
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