“ABD News का बड़ा असर: फर्जी NOC से ST भूमि हड़पने का खेल बेनकाब, ग्राम पंचायत ने खुद खोली पोल!” - अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़

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    Saturday, April 25, 2026

    “ABD News का बड़ा असर: फर्जी NOC से ST भूमि हड़पने का खेल बेनकाब, ग्राम पंचायत ने खुद खोली पोल!”



    📍 बालोतरा | राजस्थान ब्यूरो | असरफ मारोठी की रिपोर्ट

    राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा तहसील अंतर्गत मंडापुरा ग्राम में बहुचर्चित एसटी कृषि भूमि संपरिवर्तन घोटाले में एक बड़ा मोड़ सामने आया है। अखण्ड भारत दर्पण (ABD News) की खोजी खबर का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। ग्राम पंचायत पचपदरा ने आधिकारिक पत्र जारी कर उस कथित अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) को फर्जी करार दे दिया है, जिसके आधार पर वर्षों पहले भूमि संपरिवर्तन आदेश जारी किया गया था।

    यह खुलासा न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस प्रकार सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर कर कमजोर वर्ग (ST समुदाय) की भूमि पर कब्जा करने की साजिश रची गई।







    ⚠️ मामला क्या है?

    यह पूरा मामला मंडापुरा ग्राम के खसरा नंबर 802 की कृषि भूमि से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि इस भूमि का संपरिवर्तन फर्जी दस्तावेजों और कूटरचना (Forgery) के आधार पर किया गया।

    ग्राम पंचायत पचपदरा द्वारा जारी पत्र क्रमांक 480 (दिनांक 11 अप्रैल 2026) में स्पष्ट कहा गया है कि:
    👉 पंचायत ने कभी भी इस भूमि संपरिवर्तन के लिए कोई NOC जारी नहीं किया।

    यानी जिस दस्तावेज को आधार बनाकर संपरिवर्तन आदेश पारित हुआ, वह पूरी तरह से फर्जी निकला।







    🔍 ABD News की पड़ताल में सामने आईं बड़ी अनियमितताएं

    1️⃣ फर्जी NOC का खेल

    08 फरवरी 2007 को जारी संपरिवर्तन आदेश में ग्राम पंचायत की NOC संलग्न होने का उल्लेख किया गया।
    लेकिन पंचायत ने खुद ही इससे इनकार कर दिया।

    👉 यह सीधे-सीधे सरकारी रिकॉर्ड में फर्जी दस्तावेज जोड़ने का मामला बनता है।


    2️⃣ तिथियों में बड़ा घोटाला (Timeline Manipulation)

    दस्तावेजों की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:

    • चालान जमा: 05/08/2006
    • आवेदन दर्ज: 29/10/2006
    • जमाबंदी: 23/12/2006

    👉 यानी आवेदन से पहले ही फीस जमा हो गई और बाद में दस्तावेज जोड़े गए।

    यह पूरी प्रक्रिया पूर्व नियोजित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।


    3️⃣ आवेदन प्रक्रिया में गंभीर खामियां

    • आवेदन पत्र पर तिथि नहीं
    • आवेदक के अंगूठा निशान का सत्यापन नहीं
    • दस्तावेजों का क्रम संदिग्ध

    👉 इससे पूरी पत्रावली की वैधता संदिग्ध हो जाती है।


    4️⃣ एसटी कृषक के नाम पर कथित शोषण

    आवेदक स्वर्गीय ढलाराम भील बताए गए हैं, जो:

    • अशिक्षित थे
    • गंभीर रूप से बीमार थे

    परिजनों का आरोप है कि उनकी स्थिति का फायदा उठाकर फर्जी आवेदन तैयार किया गया।

    👉 यह मामला केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि सामाजिक शोषण से भी जुड़ा है।


    5️⃣ कलेक्टर के आदेश भी बेअसर 😟

    10 नवंबर को जिला कलेक्टर बालोतरा को शिकायत दी गई थी।
    कलेक्टर ने तत्काल जांच के आदेश भी दिए।

    लेकिन:
    👉 6 महीने बाद भी जांच अधूरी है

    यह प्रशासन की निष्क्रियता या संभावित दबाव को दर्शाता है।


    6️⃣ लगातार शिकायतें, फिर भी कार्रवाई नहीं

    पीड़ित परिवार ने:

    • कई ज्ञापन दिए
    • जिला और राज्य स्तर तक शिकायत की

    फिर भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।


    7️⃣ भूमाफिया-अधिकारी गठजोड़ की आशंका 🕵️‍♂️

    स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि:
    👉 जांच को जानबूझकर रोका जा रहा है
    👉 भूमाफिया और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत हो सकती है

    हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन परिस्थितियां संदेह जरूर पैदा करती हैं।


    ⚖️ अब तक की स्थिति

    • संपरिवर्तन आदेश अभी भी प्रभावी
    • जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं
    • दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं

    👉 यानी फर्जीवाड़ा उजागर होने के बावजूद सिस्टम अब भी मौन है।


    🗣️ पीड़ित परिवार की मांग

    पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मांग की है:

    ✅ संपरिवर्तन आदेश को तुरंत रद्द किया जाए
    ✅ पूरे मामले की उच्च स्तरीय/स्वतंत्र जांच हो
    ✅ दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो
    ✅ परिवार को न्याय मिले


    सबसे बड़ा सवाल

    👉 जब ग्राम पंचायत खुद कह रही है कि NOC जारी ही नहीं हुई,
    तो फिर संपरिवर्तन आदेश किस आधार पर पास हुआ?

    👉 और कलेक्टर के आदेश के बावजूद जांच अब तक लंबित क्यों है?

    ये सवाल न केवल प्रशासन की पारदर्शिता पर बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करते हैं।


    📢 ABD News का प्रभाव

    इस पूरे मामले में एक बात साफ है—
    👉 अगर अखण्ड भारत दर्पण (ABD News) यह मुद्दा नहीं उठाता,
    तो शायद यह फर्जीवाड़ा कभी सामने नहीं आता।

    यह पत्रकारिता की ताकत का उदाहरण है, जहां एक सच्ची रिपोर्टिंग ने:

    • प्रशासन को जवाब देने पर मजबूर किया
    • और पीड़ित परिवार को आवाज दी

    🧾 डिस्क्लेमर

    यह रिपोर्ट शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों, ग्राम पंचायत के आधिकारिक पत्र एवं उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तैयार की गई है।
    👉 अंतिम निष्कर्ष प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।


    📌 निष्कर्ष

    मंडापुरा का यह मामला सिर्फ एक भूमि विवाद नहीं है, बल्कि यह सिस्टम में व्याप्त उस खामी को उजागर करता है, जहां कमजोर वर्ग की जमीन पर नजर रखकर फर्जीवाड़ा किया जाता है।

    अब देखने वाली बात यह होगी कि:
    👉 प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है
    👉 और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है या नहीं


    🔥 ABD News – सच की आवाज़



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