किसान सभा निरमण्ड ब्लॉक के अध्यक्ष देवकी नंद व सचिव जगदीश ने एक संयुक्त व्यान में कहा है कि किसान सभा व संयुक्त किसान मंच अदाणी एग्री फ्रेश द्वारा जो सेब खरीद के दाम तय किए है उसे पूर्ण रूप से नकारता है। क्योंकि यह गत वर्ष की तुलना में बेहद कम है। जबकि खाद, कीटनाशक, फफूंदीनाशक, कार्टन, ट्रे व अन्य लागत वस्तुओं की कीमतों में 25 से 80 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है । गत वर्ष कंपनियों के द्वारा जिस सेब के दाम 85 रुपये, 73 रुपये, 63 रुपये व 53 रुपये प्रति किलो के हिसाब से तय किए थे, वह इस वर्ष अदाणी द्वारा 76 रुपये, 68 रुपये, 60 रुपये व 52 रुपये प्रति किलो तय किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार अदाणी व अन्य कंपनियों के दबाव में काम कर रही है और इन कंपनियों के द्वारा बागवानों के शोषण व लूट की खुली छूट दे रही है।किसान सभा सरकार से मांग करती है कि सरकार तुरन्त अदाणी व अन्य कंपनियों द्वारा घोषित दाम को निरस्त करे तथा कंपनियों के द्वारा बागवानों के शोषण व लूट पर तुरन्त रोक लगाए। अपने वायदे के अनुसार सरकार इन कंपनियों के द्वारा सेब के दाम तय करने के लिए तुरन्त कमेटी का गठन करें जिसमें बागवानों के प्रतिनिधि अवश्य सम्मिलित हो। सरकार की इस वायदा खिलाफी व किसान बागवान विरोधी रवैये के विरुद्ध किसान सभा संयुक्त किसान मंच के साथ मिलकर अपना आंदोलन तेज करेगी और 25 अगस्त,2022 को अदाणी के कोल्ड स्टोर विथल में आंदोलन करेगी। संयुक्त किसान मंच सभी बागबानों से अपील करता है कि इस दिन अपना सेब बेचना भी बन्द करें। सभी मांगों को मानकर इन्हें जमीनी स्तर पर लागू कर किसानों व बागवानों को राहत प्रदान करें।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में संयुक्त किसान मंच के प्रतिनिधियों के साथ 28 जुलाई को जो बैठक की गई थी उसमें मुख्यमंत्री ने अन्य मांगों के साथ आश्वासन दिया था कि अदाणी व अन्य कंपनियों के द्वारा सेब के दाम तय करने के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा उसमें बागवान भी शामिल किए जायेंगे। उसके पश्चात बागवानों द्वारा 5 अगस्त को सचिवालय घेराव किया गया तथा उसके बाद मुख्यसचिव के साथ जो बैठक हुई उसमें मुख्यसचिव ने स्वयं कहा कि बागवानी विश्वविद्यालय नौणी की अध्यक्षता में कंपनियों के द्वारा सेब के दाम तय करने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है जिसमें बागवानों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। परन्तु सरकार ने अभी तक कमेटी का गठन नहीं किया और अब अदाणी व अन्य कंपनियों ने सेब के दाम तय कर दिए हैं। इससे सरकार के झूठ का पर्दाफाश हुआ है व इनकी कंपनियों के साठगांठ सामने आई है।
सरकार द्वारा अभी तक संयुक्त किसान मंच द्वारा तय किए गए 20 सूत्रीय मांगपत्र पर कोई भी ठोस कार्यवाही नहीं की है और मात्र झूठी घोषणाएं कर भ्रम फैला रही है। सरकार निरन्तर किसान विरोधी नीतियों को लागू कर कृषि संकट को बढ़ा रही है। जिससे प्रदेश में आज कृषि व बागवानी से आजीविका कमाने वाले लाखों परिवारों का रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। संयुक्त किसान मंच सरकार की इन किसान व बागवान विरोधी नीतियों को पलटने के लिए सभी किसानों व बागवानों से आग्रह करता है कि संगठित होकर आंदोलन में भागीदारी कर अपने संघर्ष को तेज करे।
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