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चंबा में शिक्षकों को नई शिक्षा नीति के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा रहा — समग्र शिक्षा अभियान के तहत आधुनिक मूल्यांकन प्रणाली पर दो दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न

A two-day teacher training workshop under the Samagra Shiksha Abhiyan,Himachal Pradesh was organized at KD Resort,Kayani (Chamba),

 कयाणी स्थित केडी रिजॉर्ट में 77 शिक्षकों ने लिया भाग, ट्रेनर ज्योतिप्रीधि व कोऑर्डिनेटर चमन घटोट ने दिए प्रश्नपत्र निर्माण और मूल्यांकन प्रक्रिया के व्यावहारिक गुर

चंबा, 15 अक्तूबर (भूषण गुरुंग):

शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षकों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से समग्र शिक्षा, हिमाचल प्रदेश द्वारा जिले भर में शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में चंबा के निकट कयाणी स्थित केडी रिजॉर्ट में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें सुंडला-सलूणी ब्लॉक के लगभग 77 शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।


यह प्रशिक्षण सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) प्रणाली और आधुनिक मूल्यांकन पद्धतियों पर आधारित था। सत्र के दौरान शिक्षकों को न केवल नई मूल्यांकन तकनीकों से परिचित कराया गया, बल्कि प्रश्नपत्र निर्माण के वैज्ञानिक और व्यावहारिक पहलुओं पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

शिक्षकों को नई सोच के साथ शिक्षण का अवसर

प्रशिक्षण कार्यशाला के पहले दिन ट्रेनर ज्योतिप्रीधि ने शिक्षकों को नई शिक्षा नीति (NEP 2020) की मूल भावना से अवगत करवाया। उन्होंने बताया कि अब शिक्षा का फोकस केवल परीक्षा में प्राप्त अंकों तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित है।

CCE प्रणाली में बच्चे की बौद्धिक, सामाजिक और भावनात्मक क्षमताओं को पहचानकर उन्हें प्रोत्साहित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “हर बच्चा अलग सोच और क्षमता लेकर आता है, शिक्षक का कार्य उस क्षमता को दिशा देना है।”

प्रश्नपत्र निर्माण पर व्यावहारिक सत्र

दूसरे दिन प्रशिक्षण का केंद्र बिंदु था — प्रश्नपत्र निर्माण और मूल्यांकन प्रक्रिया की तकनीक।

कोऑर्डिनेटर चमन घटोट ने इस विषय पर विस्तार से बात करते हुए बताया कि प्रश्नपत्र तैयार करते समय शिक्षकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि प्रश्न न केवल पाठ्यक्रम पर आधारित हों, बल्कि छात्रों की समझ, विश्लेषण और अभिव्यक्ति की क्षमता को भी मापें।

उन्होंने शिक्षकों को ब्लूम टैक्सोनॉमी (Bloom’s Taxonomy) के विभिन्न स्तरों के बारे में जानकारी दी और उदाहरणों के माध्यम से बताया कि किस तरह से ‘स्मृति आधारित प्रश्नों’ की तुलना में ‘तर्क और विश्लेषण आधारित प्रश्न’ विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को बेहतर दर्शाते हैं।

इस अवसर पर शिक्षकों ने विभिन्न विषयों के प्रश्नपत्र निर्माण का अभ्यास किया और एक-दूसरे के तैयार किए गए प्रश्नपत्रों की समीक्षा कर मूल्यांकन प्रक्रिया में सुधार के उपाय सुझाए।

शिक्षा में तकनीक का उपयोग — बदलता शैक्षणिक परिदृश्य

कार्यशाला में यह भी बताया गया कि आज के डिजिटल युग में शिक्षकों के लिए तकनीक का प्रयोग आवश्यक है।

ज्योतिप्रीधि ने कहा, “शिक्षा अब केवल ब्लैकबोर्ड और चॉक तक सीमित नहीं रह गई है। अब डिजिटल टूल्स, ऑनलाइन क्विज़, और इंटरएक्टिव एप्लिकेशन के माध्यम से बच्चे ज्यादा रुचि लेकर सीखते हैं।”

उन्होंने शिक्षकों को सुझाव दिया कि वे कक्षा में तकनीकी साधनों का उपयोग बढ़ाएं ताकि छात्रों की सहभागिता और जिज्ञासा दोनों में वृद्धि हो।

समग्र शिक्षा अभियान की व्यापक पहल

जानकारी के अनुसार, समग्र शिक्षा, हिमाचल प्रदेश द्वारा यह विशेष अभियान जुलाई माह से पूरे चंबा जिले में चलाया जा रहा है।

इसके अंतर्गत अब तक तीसा, भटियात, पांगी (किलाड़) और चंबा में शिक्षकों के लिए ऐसे ही प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा चुके हैं।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को नई शिक्षा नीति और मूल्यांकन प्रणाली के अनुरूप प्रशिक्षित कर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना है।

अभियान के तहत हर उपमंडल में विषय विशेषज्ञों द्वारा कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें शिक्षकों को प्रायोगिक मूल्यांकन, विद्यार्थियों की निरंतर प्रगति का रिकॉर्ड रखना, और सीखने की कठिनाइयों की पहचान कर सुधारात्मक कदम उठाने जैसे विषयों पर प्रशिक्षित किया जा रहा है।

शिक्षकों ने साझा किए अनुभव

कार्यशाला में भाग लेने वाले शिक्षकों ने बताया कि इस तरह के प्रशिक्षण से उन्हें अपने शिक्षण कार्य में नवीनता लाने की प्रेरणा मिलती है।

सलूणी ब्लॉक के एक शिक्षक ने कहा, “पहले हम केवल परीक्षा के परिणामों पर ध्यान देते थे, लेकिन अब हमें यह समझ आया है कि मूल्यांकन एक सतत प्रक्रिया है जो पूरे सत्र में विद्यार्थियों के विकास को आंकती है।”

वहीं, सुंडला क्षेत्र की शिक्षिका सीमा देवी ने कहा, “प्रश्नपत्र निर्माण और मूल्यांकन तकनीक पर मिले व्यावहारिक प्रशिक्षण से अब हमें छात्रों की वास्तविक सीखने की क्षमता को आंकने में आसानी होगी।”

जिला स्तर पर शिक्षा सुधार की दिशा में कदम

समग्र शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक ने बताया कि यह कार्यक्रम आने वाले महीनों में अन्य ब्लॉकों में भी जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल परीक्षा परिणामों को बेहतर बनाना नहीं है, बल्कि छात्रों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और समस्या-समाधान कौशल विकसित करना भी है।

इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों ने कहा कि आने वाले समय में शिक्षा विभाग ऐसे और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा जिनमें शिक्षकों को कक्षा प्रबंधन, डिजिटल शिक्षण साधनों का उपयोग, और विद्यार्थियों की मानसिक भलाई पर भी प्रशिक्षित किया जाएगा।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, यह दो दिवसीय कार्यशाला न केवल शिक्षकों के लिए ज्ञानवर्धक साबित हुई, बल्कि इसने उन्हें नई शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप शिक्षण के नए दृष्टिकोण से भी अवगत कराया।

चंबा जिले में चल रहा यह प्रशिक्षण अभियान शिक्षा में गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक मजबूत कदम है, जो आने वाले समय में विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी व रचनात्मक बनाएगा


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