भारत में नर्सों की कमी, बड़ी संख्या में नौकरी के लिए विदेश जाने से और बिगड़े हालात
उजाला सिग्नस ग्रुप ऑफ अस्पताल के डॉ. शुचिन बजाज ने बताया कि देश से बड़ी संख्या में नर्सें नौकरी के लिए विदेश जा रही हैं और ये भी चिंता का विषय है। नर्सों को देश में ही प्रशिक्षित करने और उन्हें आधुनिक चिकित्सा तकनीकों से वाकिफ किया जाना चाहिए।
भारत में पहले से ही नर्सों की कमी है और अब हालात और तेजी से खराब हो रहे हैं। दरअसल बड़ी संख्या में भारतीय नर्सें विदेशों में नौकरी के लिए पलायन कर रही है, इससे देश में मरीजों और नर्सों का अनुपात गड़बड़ा गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस पर चिंता जताई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक संयुक्त बयान जारी कर देश में नर्सों की कमी पर चिंता जताई है
नर्सों की कमी के आंकड़े
इंडियन नर्सिंग काउंसिल के आंकड़ों का हवाला देते हुए एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स के डायरेक्टर जनरल डॉ. गिरधर ज्ञानी ने कहा कि देश में अभी 33 लाख पंजीकृत नर्सें हैं, लेकिन यह देश की 130 करोड़ जनसंख्या के लिहाज से नाकाफी हैं। भारत में एक हजार मरीजों पर नर्सों का आंकड़ा 1.96 है, जो कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों प्रति हजार मरीजों पर तीन नर्सों से कम है। उजाला सिग्नस ग्रुप ऑफ अस्पताल के डॉ. शुचिन बजाज ने बताया कि देश से बड़ी संख्या में नर्सें नौकरी के लिए विदेश जा रही हैं और ये भी चिंता का विषय है। नर्सों को देश में ही प्रशिक्षित करने और उन्हें आधुनिक चिकित्सा तकनीकों से वाकिफ किया जाना चाहिए।
नर्सों को आधुनिक प्रशिक्षण देकर स्वास्थ्य लागत को किया जा सकता है कम
डॉ. बजाज ने कहा टियर-2 और टियर-3 शहरों में चुनौतियां ज्यादा हैं क्योंकि इन शहरों में आधुनिक अस्पताल हैं, लेकिन प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की कमी है। डॉ. ज्ञानी ने कहा कि स्किल कार्यबल को बढ़ाने की जरूरत है और साथ ही इस दिशा में निवेश करने की भी जरूरत है। डॉ ज्ञानी ने कहा कि नर्सों को आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ ज्ञान से लैस करके न सिर्फ स्टाफ की कमी को पूरा किया जा सकता है बल्कि इससे मरीजों की देखभाल भी बेहतर होगी और स्वास्थ्य देखभाल की लागत भी कम होगी।
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