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GST काउंसिल का बड़ा फैसला: सस्ता हुआ रोज़मर्रा का सामान, किसानों-स्वास्थ्य क्षेत्र को भी राहत

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नई दिल्ली। देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने और घरेलू खपत बढ़ाने के उद्देश्य से जीएसटी काउंसिल ने टैक्स स्ट्रक्चर में बड़ा फेरबदल किया है। रविवार को हुई बैठक में परिषद ने दैनिक उपयोग की वस्तुओं से लेकर कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र तक कई वस्तुओं व सेवाओं पर कर की दरों में कटौती को मंजूरी दी। इस निर्णय से उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर राहत मिलेगी और उद्योग जगत को भी बढ़ावा मिलेगा।


काउंसिल का मानना है कि इन सुधारों से न केवल महंगाई पर नियंत्रण लगेगा, बल्कि अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ्स से उत्पन्न आर्थिक दबाव को भी कम करने में मदद मिलेगी।


क्या-क्या होगा सस्ता?


1. रोज़मर्रा की ज़रूरतें (Daily Essentials)


शैम्पू, साबुन और टूथपेस्ट जैसी हाइजीन प्रोडक्ट्स पर जीएसटी स्लैब को 18% से घटाकर 12% किया गया।


बटर और चीज़ जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स पर टैक्स 12% से घटकर 5% कर दिया गया।


इससे आम उपभोक्ताओं की मासिक रसोई और घरेलू खर्चों में सीधी राहत मिलेगी।



2. कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था


किसानों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों पर टैक्स की दरें 28% से घटाकर 18% कर दी गई हैं।


बीज, खाद और कीटनाशक पर कर दर 12% से घटाकर 5% कर दी गई है।


ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खेती-किसानी को मजबूती देने के लिए यह बड़ा कदम माना जा रहा है।



3. स्वास्थ्य क्षेत्र (Healthcare Sector)


हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स दर 18% से घटाकर 12% की गई।


दवाओं और मेडिकल उपकरणों पर जीएसटी में भी कमी की गई है, जिससे इलाज की लागत में कमी आएगी।


सरकार का मानना है कि इससे स्वास्थ्य सेवाएं आम जनता के लिए अधिक सुलभ होंगी।




काउंसिल के फैसले के प्रमुख बिंदु


1. लगभग 90 वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स दर में कमी।



2. उपभोक्ताओं की डिस्पोजेबल आय में बढ़ोतरी की संभावना।



3. ग्रामीण भारत और मिडिल क्लास परिवारों को सीधा फायदा।



4. घरेलू खपत बढ़ने से उद्योग जगत को प्रोत्साहन मिलेगा।



5. अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक दबाव (US Tariffs) से निपटने की रणनीति।

अर्थव्यवस्था पर असर


घरेलू खपत में बढ़ोतरी


विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स दरों में कटौती से उपभोक्ता खर्च बढ़ेगा। जब रोज़मर्रा के सामान और स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती होंगी तो लोग अधिक खरीदारी करेंगे। इससे बाजार में मांग (Demand) बढ़ेगी और उत्पादन (Production) में भी इज़ाफा होगा।


महंगाई पर नियंत्रण


पिछले कुछ महीनों में महंगाई दर लगातार चिंता का विषय बनी हुई थी। रोजमर्रा की ज़रूरतों के सामान की कीमतें घटने से खुदरा महंगाई पर अंकुश लगने की उम्मीद है।


कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा


कृषि उपकरणों और इनपुट्स पर टैक्स घटने से किसानों की लागत में कमी आएगी। इससे न सिर्फ खेती को बढ़ावा मिलेगा बल्कि ग्रामीण उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति (Purchasing Power) भी बढ़ेगी।


स्वास्थ्य क्षेत्र में राहत


हेल्थ इंश्योरेंस और दवाइयां सस्ती होने से मध्यम वर्ग और बुज़ुर्गों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही निजी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भरता रखने वाले परिवारों पर आर्थिक बोझ भी घटेगा।



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राजनीतिक और सामाजिक संदेश


सरकार ने जीएसटी में यह बड़ा बदलाव ऐसे समय किया है जब आम आदमी महंगाई से परेशान है और विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर हमलावर रहा है। इस कदम से न केवल जनता को राहत मिलेगी बल्कि राजनीतिक रूप से भी सरकार को फायदा हो सकता है।



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विशेषज्ञों की राय


अर्थशास्त्री डॉ. अरुण कुमार का कहना है कि यह कदम सही समय पर लिया गया है। “टैक्स कटौती से उपभोक्ता बाजार में सकारात्मक ऊर्जा आएगी। हालांकि, सरकार को यह भी ध्यान रखना होगा कि टैक्स कलेक्शन पर इसका क्या असर पड़ेगा।”


व्यापार मंडल एसोसिएशन ने इस निर्णय का स्वागत किया है और कहा कि “सस्ते सामान से बिक्री बढ़ेगी और कारोबार को गति मिलेगी।”




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जीएसटी काउंसिल की अगली प्राथमिकताएं


काउंसिल ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में डिजिटल इकॉनमी और MSME सेक्टर को भी जीएसटी ढांचे में और सरल बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।



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निष्कर्ष


जीएसटी काउंसिल का यह बड़ा सुधार आम आदमी की जेब पर बोझ कम करेगा और अर्थव्यवस्था को नई गति देगा। रोजमर्रा के सामान, कृषि उपकरण और स्वास्थ्य सेवाओं पर टैक्स घटाकर सरकार ने सीधे तौर पर उपभोक्ताओं और किसानों को राहत दी है। अब देखना यह होगा कि आने वाले महीनों में इसका राजस्व और अर्थव्यवस्था पर कितना सकारात्मक असर पड़ता है।


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