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    Monday, July 8, 2024

    मां ने बच्चे को फोन थमाकर बनवाया खुद का सेक्स वीडियो, बॉम्बे हाई कोर्ट ने दी अंतरिम जमानत

     मां ने बच्चे को फोन थमाकर बनवाया खुद का सेक्स वीडियो, बॉम्बे हाई कोर्ट ने दी अंतरिम जमानत




    Mumbai News: बच्चे को फोन थमाकर यौन क्रियाकलाप करवाने के आरोपी व्यक्ति को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने POCSO यानी प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस मामले में अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी है। आरोपी ने कथित तौर पर पीड़ित बच्चे की मां से उसके साथ यौन संबंध बनाने का वीडियो रिकॉर्ड करने को कहा था।

    जस्टिस मनीष पिताले इस मामले की सुनवाई कर रहे थे। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने कहा, ‘यह बेहद आश्चर्यजनक है कि बच्चे की मां पर भी इस तरह के आरोप लगाए गए। प्रथम दृष्टया… यहां ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह संकेत मिले कि बच्चे की मां यानी सह-आरोपी नंबर 1 को हिरासत में लिया गया था या इसके लिए प्रयास भी किए गए थे। ऐसा लगता है कि आवेदक ने आरोपी नंबर 1 के साथ मिलकर गतिविधियों को अंजाम दिया है, जिसके चलते मौजूदा एफआईआर दर्ज की गई।’

    हीं करता और जांच में सहयोग नहीं करता, तब तक कोर्ट उसे अंतरिम संरक्षण दे रहा है।’ कोर्ट ने यह भी कहा कि जमानत शर्तों का उल्लंघन करने पर अंतरिम जमानत रद्द कर दी जाएगी। इस मामले में आगे की सुनवाई 19 जुलाई को होगी।

    क्या था मामला

    आवेदक के खिलाफ नवी मुंबई में एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप थे कि आवेदक ने पीड़ित बच्चे की मां के साथ मिलीभगत करके बच्चे को अपनी यौन गतिविधियों को रिकॉर्ड करने के लिए मोबाइल दिया था। इसके बाद उसने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

    कोर्ट ने पाया कि आवेदक और बच्चे की मां शादीशुदा हैं और प्रथम दृष्टया यह मामला विवाहेतर संबंध का लगता है। खास बात यह है कि सत्र न्यायालय ने भी बच्चे की मां द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर पर नियमित जमानत दी थी, जिसमें बलात्कार समेत कई आरोप लगाए गए थे। फिलहाल कोर्ट ने पाया कि आवेदक ने पिछली सभी जमानत शर्तों का पालन किया है और उसका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया है।

    रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने पाया कि मौजूदा एफआईआर में ऐसा कोई संकेत नहीं है, जिससे पता चले कि बच्चे की मां को हिरासत में लिया गया है या इसके लिए प्रयास किए गए हैं। कोर्ट ने इस मामले में तथ्यों और पीड़ित की मां की भूमिका को देखते हुए आवेदक को अगली सुनवाई तक अंतरिम संरक्षण दिया है। चूंकि इस मामले में पीड़िता की मां भी आरोपी है, इसलिए अदालत ने हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति को पीड़ित बच्ची के लिए वकील नियुक्त करने का आदेश दिया है।



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