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दरभंगा में 13 साल की बच्ची से गैंगरेप: पंचायत ने 2 हजार रुपए जुर्माना लगाकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की

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दरभंगा में 13 साल की बच्ची से गैंगरेप: पंचायत ने 2 हजार रुपए जुर्माना लगाकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की



दरभंगा (बिहार) - बिहार के दरभंगा जिले के बड़ागाँव थाना क्षेत्र में 13 साल की एक नाबालिग बच्ची से गैंगरेप का मामला सामने आया है। यह घटना 3 अगस्त, 2024 को घटी, जब बच्ची अपनी सहेली के साथ खेतों में पशुओं के लिए घास काटने गई थी। इस जघन्य अपराध में मोहम्मद नदीम सहित चार आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, लेकिन सभी आरोपित फिलहाल फरार हैं।

घटना का विवरण

घटना के अनुसार, 3 अगस्त को नाबालिग लड़की अपनी सहेली के साथ पशुओं के लिए घास काटने  गई थी। घास काटने के बाद जब वे लौट रही थीं, तो रास्ते में बच्ची का गट्ठर खुल गया। उसने अपनी सहेली से कहा कि वह उसकी माँ को बुला लाए। सहेली के जाने के बाद, नाबालिग अकेली रह गई। इसी दौरान मोहम्मद नदीम और उसके तीन साथी वहाँ पहुँचे और उसे चाकू दिखाकर धमकाया। आरोपितों ने उसे घसीट कर पास के बगीचे में ले गए, जहाँ उन्होंने बारी-बारी से उसके साथ गैंगरेप किया।

पीड़िता ने बचने के लिए चीखने का प्रयास किया, लेकिन आरोपितों ने उसके मुँह पर गमछा बाँध दिया ताकि उसकी आवाज न निकल सके। इतना ही नहीं, उन्होंने उसे कोल्डड्रिंक में नशा मिलाकर पिलाया, जिससे वह बेहोश हो गई। रेप के बाद, आरोपितों ने उसे बेहोशी की हालत में सड़क किनारे छोड़ दिया। कुछ स्थानीय लोगों ने उसे वहाँ से उठाया और उसके घर पहुँचाया। 

पंचायत का शर्मनाक रवैया

इस वीभत्स घटना के बाद, बच्ची के परिजनों ने 4 अगस्त को गाँव के पंचायत में इस मामले की शिकायत की। परिजनों को उम्मीद थी कि पंचायत इस गंभीर मामले में न्याय करेगा। लेकिन पंचायत ने मामले को रफा-दफा करने के लिए पीड़िता के परिजनों को 2000 रुपए लेकर समझौता करने का सुझाव दिया। पंचायत के इस फैसले के बाद पीड़िता के परिजन तीन दिन तक चुप रहे, लेकिन इस फैसले से संतुष्ट नहीं होने के कारण उन्होंने 7 अगस्त को बड़ागाँव थाने में एफआईआर दर्ज करवाई।

पुलिस की ढिलाई

इस घटना में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। आरोप है कि स्थानीय थाने की पुलिस ने कार्रवाई में ढिलाई बरती और एफआईआर दर्ज होने के बावजूद पीड़िता का मेडिकल टेस्ट कराने में देरी की। पुलिस की इस लापरवाही के चलते चार दिनों  तक पीड़िता का मेडिकल परीक्षण नहीं हो सका। परिजनों का कहना है कि घटना के बाद बच्ची दो दिन तक बेहोश रही और उसके गले पर खरोंच के निशान और गुप्तांग में सूजन आ गई थी।

एसपी की सफाई और पुलिस की कार्रवाई

इस मामले में दरभंगा के एसपी ग्रामीण काव्या मिश्रा ने सफाई दी है। उन्होंने बताया कि 9 अगस्त को पीड़िता और उसकी माँ को थाने बुलाया गया था। हालाँकि, अगले दो दिन शनिवार और रविवार पड़ जाने के कारण उन्हें वहीं रखा गया। इसके बाद सोमवार, 12 अगस्त को पीड़िता का 164 के तहत कोर्ट में बयान दर्ज हुआ और मेडिकल परीक्षण भी करवाया गया, जिसमें अल्ट्रासॉउन्ड भी शामिल था।

वहीं, दरभंगा के एसएसपी आईपीएस जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी ने थाना स्तर पर पुलिस की लापरवाही को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले की जाँच करवा रहे हैं और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी।

अपराधियों की गिरफ्तारी और न्याय की उम्मीद

इस घटना से दरभंगा और आसपास के इलाकों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाओं से क्षेत्र में भय का माहौल बनता जा रहा है। पुलिस पर भरोसा न कर पाने की स्थिति में ग्रामीणों का आक्रोश और भी बढ़ गया है। स्थानीय प्रशासन पर दबाव है कि वह आरोपितों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर पीड़िता को न्याय दिलाए।

इस घटना ने न केवल पुलिस और पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि समाज के नैतिक पतन की ओर भी इशारा किया है। जिस पंचायत से न्याय की उम्मीद की जाती है, वह खुद अपराधियों के पक्ष में फैसला सुनाने लगी है। यह  घटना समाज में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा के प्रति लापरवाही और संवेदनहीनता को उजागर करती है।

न्याय केवल कोर्ट-कचहरी में नहीं

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ हो रहे अपराधों के प्रति समाज और प्रशासन को और अधिक संवेदनशील और सजग होने की जरूरत है। न्याय केवल कोर्ट-कचहरी में नहीं, बल्कि समाज के हर उस कोने में हो जहाँ किसी के साथ अन्याय हो। इस घटना में पीड़िता और उसके परिवार को न्याय मिलना न केवल उनके लिए, बल्कि समाज के लिए भी जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे अपराध करने वाले अपराधियों को कानून और समाज का डर बना रहे।

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