बस्सी पावर प्रोजेक्ट के पोटेंशनल ट्रांसफार्मर में हुआ ब्लास्ट, तीन जिलों में 6 घंटे तक रहा ब्लैकआउट
मंडी: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित बस्सी पावर प्रोजेक्ट में सोमवार सुबह एक गंभीर दुर्घटना हुई। 66 मेगावाट की बस्सी परियोजना के स्विचयार्ड में पोटेंशनल ट्रांसफार्मर में अचानक ब्लास्ट हो गया, जिसके चलते तीन जिलों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई। इस घटना ने पालमपुर, बैजनाथ, हमीरपुर और जोगिंद्रनगर समेत आसपास के इलाकों को गहरे अंधकार में धकेल दिया। ब्लैकआउट के चलते न केवल घरेलू उपभोक्ता, बल्कि सरकारी कार्यालय, बैंक, डाकघर, साइबर कैफे और अस्पताल भी बुरी तरह प्रभावित हुए।
बिजली गुल, सेवाएं ठप
सुबह करीब 6 बजे हुए इस हादसे के बाद, विद्युत आपूर्ति अचानक बंद हो गई, जिससे लगभग 6 घंटे तक तीन जिलों में बिजली नहीं रही। इस दौरान पालमपुर, बैजनाथ और हमीरपुर जिलों के अधिकांश हिस्सों में बिजली गुल रही। जोगिंद्रनगर उपमंडल के मकरीड़ी, चौंतड़ा और लडभड़ोल क्षेत्र भी ब्लैकआउट की चपेट में आ गए। इस ब्लैकआउट के कारण सरकारी और निजी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं।
बिजली आपूर्ति ठप होने से जोगिंद्रनगर के डाकघर और बैंकों का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ। पेंशनधारकों को बिना पेंशन के ही घर लौटना पड़ा। बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग पेंशन के लिए आए लोगों को भी निराशा हाथ लगी। इसी तरह, तहसील कार्यालय में ऑनलाइन प्रमाण पत्र बनाने का काम ठप हो गया, जिससे लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। साइबर कैफे में ऑनलाइन काम नहीं हो पाए और छात्रों को भी काफी मुश्किलें हुईं।
बिजली कटौती से जीवन प्रभावित
जोगिंद्रनगर के बस अड्डे पर भी इस बिजली कटौती का असर देखा गया। बिजली न होने के कारण लंबी दूरी की बसों की ऑनलाइन टिकटें समय पर नहीं बन पाई, जिससे यात्रियों को परेशानी हुई। वहीं, सिविल अस्पताल जोगिंद्रनगर में एक्सरे और अन्य टेस्ट भी प्रभावित हुए। दांतों की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे दर्जनों मरीजों को बिना उपचार लौटना पड़ा। बिजली की इस अघोषित कटौती से व्यापारियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा। दुकानें, फैक्ट्रियां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान बिजली के अभाव में ठप हो गए, जिससे कारोबारी गतिविधियां रुक गईं।
बिजली बोर्ड की प्रतिक्रिया और वैकल्पिक व्यवस्था
बिजली बोर्ड जोगिंद्रनगर से मिली जानकारी के अनुसार, शहरी क्षेत्र के मुख्य बाजार, गरोडू, बालकरूपी और मझारनू के कुछ हिस्सों में वैकल्पिक बिजली आपूर्ति की व्यवस्था की गई थी। हालांकि, उपमंडल के अन्य क्षेत्रों में बिजली सेवाएं दोपहर करीब डेढ़ बजे के बाद ही बहाल हो पाईं। अधिशाषी अभियंता विद्युत मंडल जोगिंद्रनगर, पूर्ण चंद ने बताया कि ब्लास्ट के कारण उपमंडल के 90 प्रतिशत विद्युत उपभोक्ताओं को बिजली की अघोषित कटौती का सामना करना पड़ा। हालांकि, बिजली बोर्ड द्वारा शहरी क्षेत्र और उसके साथ लगते कुछ ग्रामीण हिस्सों में वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी, लेकिन यह व्यवस्था पूरी तरह से पर्याप्त नहीं थी।
बस्सी पावर प्रोजेक्ट में अचानक से विद्युत उत्पादन ठप होने का सीधा असर जोगिंद्रनगर, पालमपुर और हमीरपुर के कुछ हिस्सों पर पड़ा। इस घटना के कारण इन इलाकों में करीब 6 घंटे तक बिजली आपूर्ति नहीं हो पाई, जिससे उपभोक्ताओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। आरई बस्सी परियोजना के जितेंद्र कुमार ने कहा कि इस तरह की घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण हैं और परियोजना की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है।
आवश्यक सेवाओं पर असर
इस बिजली कटौती का असर न केवल घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ा, बल्कि आवश्यक सेवाओं पर भी देखा गया। बिजली की कमी के चलते जोगिंद्रनगर के सिविल अस्पताल में एक्सरे और अन्य टेस्ट बंद हो गए, जिससे मरीजों को बिना इलाज ही लौटना पड़ा। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को भी इलाज में देरी का सामना करना पड़ा। बिजली कटौती से अस्पताल की अन्य सेवाएं भी प्रभावित हुईं।
इसके अलावा, बिजली न होने के कारण जोगिंद्रनगर, पालमपुर और बैजनाथ के सरकारी और निजी कार्यालयों का कामकाज बुरी तरह से प्रभावित हुआ। तहसील कार्यालय में ऑनलाइन प्रमाण पत्र न बनने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। साइबर कैफे में भी ऑनलाइन काम पूरे नहीं हो पाए, जिससे छात्रों और अन्य उपभोक्ताओं को असुविधा हुई। डाकघर में बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों की पेंशन वितरण भी रुक गई, जिससे पेंशनधारक खाली हाथ ही लौट गए।
आर्थिक नुकसान और भविष्य की चिंता
इस घटना ने क्षेत्र के व्यापारियों को भी भारी नुकसान पहुंचाया। बिजली की कटौती से दुकानों और फैक्ट्रियों का काम ठप हो गया, जिससे कारोबारी गतिविधियां रुक गईं। मंडी, पालमपुर और हमीरपुर के व्यापारियों ने इस अघोषित बिजली कटौती पर गहरी चिंता जताई है और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि क्षेत्र के विकास पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। वे चाहते हैं कि विद्युत विभाग और संबंधित अधिकारी ऐसी दुर्घटनाओं से बचने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करें। साथ ही, ऐसी घटनाओं के लिए तुरंत प्रतिक्रिया देने और बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए एक प्रभावी योजना तैयार की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में उपभोक्ताओं को कम से कम असुविधा का सामना करना पड़े।
प्रोजेक्ट में हुए इस ब्लास्ट से तीन जिलों में अंधकार
बस्सी पावर प्रोजेक्ट में हुए इस ब्लास्ट ने तीन जिलों में अंधकार और असुविधा की स्थिति पैदा कर दी। 6 घंटे तक चली इस बिजली कटौती ने न केवल दैनिक जीवन को प्रभावित किया, बल्कि आवश्यक सेवाओं, सरकारी कार्यालयों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी ठप कर दिया। हालांकि, बिजली बोर्ड द्वारा कुछ इलाकों में वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी, लेकिन उपभोक्ताओं को पूरी तरह से राहत नहीं मिल पाई। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति की सुरक्षा और स्थिरता के लिए और अधिक सतर्कता और उपायों की जरूरत है।
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