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नेपाल बस हादसे में 27 भारतीयों की दर्दनाक मौत: आज इंडियन एयरफोर्स वापस लाएगी शव

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 नेपाल बस हादसे में 27 भारतीयों की दर्दनाक मौत: आज इंडियन एयरफोर्स वापस लाएगी शव


नेपाल के तनहुन जिले में हुए बस हादसे में अब तक 27 भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है। यह हादसा शुक्रवार को तब हुआ जब गोरखपुर नंबर की एक बस मर्स्यांगदी नदी में गिर गई। इस बस में कुल 43 लोग सवार थे, जिनमें से अधिकांश महाराष्ट्र के रहने वाले थे। हादसे के तुरंत बाद 16 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 11 अन्य ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मृतकों में से 24 शवों की पहचान की जा चुकी है, जो कि महाराष्ट्र के जलगांव जिले के विभिन्न इलाकों के निवासी थे।

हादसे का विवरण

हादसा तब हुआ जब बस पोखरा से काठमांडू की ओर जा रही थी। बस तनहुन जिले के आइना पहारा में हाईवे से गुजर रही थी, तभी अचानक अनियंत्रित होकर मर्स्यांगदी नदी में गिर गई। हादसा इतना भयानक था कि बस पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। स्थानीय लोगों और पुलिस ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया, लेकिन हालात इतने गंभीर थे कि कई लोगों को बचाया नहीं जा सका।

घायल यात्रियों को त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। हादसे के बाद नेपाल और भारत सरकार ने तत्काल मदद के लिए कदम उठाए हैं।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप

घटना की सूचना मिलने के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने तुरंत केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से संपर्क किया। मुख्यमंत्री ने मृतकों के शवों को वापस लाने के लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की और केंद्र सरकार से मदद की गुहार लगाई। इसके बाद गृह मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के विमान की व्यवस्था की, जो आज शवों को गोरखपुर से महाराष्ट्र ले जाएगा।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी बयान में कहा गया कि गृहमंत्री अमित शाह के हस्तक्षेप के बाद भारतीय वायुसेना का विमान शनिवार को शवों को गोरखपुर से महाराष्ट्र के नासिक ले जाएगा। राज्य सरकार इस उड़ान का पूरा खर्च वहन करेगी।

केंद्र सरकार की मदद

महाराष्ट्र के आपदा प्रबंधन निदेशक लाहू माली ने केंद्र सरकार को लिखे पत्र में कहा था कि हादसे के बाद शवों और घायल यात्रियों को गोरखपुर लाया जाएगा। लेकिन उन्हें कमर्शियल विमान से वापस महाराष्ट्र लाना संभव नहीं है, इसलिए भारतीय वायुसेना के विमान की जरूरत है। इस पत्र के बाद केंद्र सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए वायुसेना के विमान का प्रबंध किया।

शवों को वापस लाने की प्रक्रिया

आज सुबह वायुसेना का विशेष विमान गोरखपुर से उड़ान भरेगा और महाराष्ट्र के नासिक एयरपोर्ट पर लैंड करेगा। वहां से शवों को जलगांव जिले के उनके निवास स्थानों तक पहुंचाया जाएगा। स्थानीय प्रशासन ने शवों को सुरक्षित रखने और उनके परिवारों को सूचित करने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।

मृतकों के परिजनों का दर्द

महाराष्ट्र के जलगांव जिले के वरणगांव, दरियापुर, तलवेल और भुसावल के रहने वाले मृतकों के परिवारों में शोक की लहर है। हादसे की खबर सुनते ही पूरे गांव में मातम छा गया। परिजन अब अपने प्रियजनों के शवों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं। गांव के लोग भी इस दुख की घड़ी में परिजनों के साथ खड़े हैं।

नेपाल में भारतीय दूतावास का सहयोग

नेपाल में भारतीय दूतावास ने भी इस हादसे पर दुख जताते हुए कहा है कि वे भारतीय नागरिकों की हर संभव मदद करेंगे। दूतावास के अधिकारी नेपाल के स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में हैं और भारतीय नागरिकों के शवों को सुरक्षित भारत लाने के लिए प्रयासरत हैं।

पर्यटन पर असर

इस हादसे के बाद नेपाल में भारतीय पर्यटकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। नेपाल भारत के लिए एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जहां हर साल हजारों भारतीय पर्यटक आते हैं। इस हादसे ने भारतीय पर्यटकों के मन में भय पैदा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल सरकार को अब भारतीय पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए।

सरकार की जिम्मेदारी

यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि सरकारों को अपनी जिम्मेदारी कितनी गंभीरता से लेनी चाहिए। भारतीय और नेपाली सरकारों को मिलकर ऐसे हादसों को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। सड़कों की सुरक्षा, बसों की हालत और ड्राइवरों की ट्रेनिंग जैसी चीजों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं को टाला जा सके।

एक बड़ी त्रासदी है

नेपाल के इस भयानक बस हादसे में 27 भारतीयों की जान चली गई, जो कि एक बड़ी त्रासदी है। इस घटना ने दोनों देशों के बीच के सहयोग को और मजबूत किया है, लेकिन इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि सड़कों पर सुरक्षा के इंतजामों में सुधार की जरूरत है। पीड़ित परिवारों के लिए यह समय बेहद कठिन है, और महाराष्ट्र सरकार ने अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए उन्हें हर संभव मदद देने का वादा किया है। भारत और नेपाल दोनों सरकारों को मिलकर इस हादसे की जड़ तक जाना होगा और ऐसे कदम उठाने होंगे जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

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