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आंध्र प्रदेश में भीषण विस्फोट: अच्युतपुरम की दवा फैक्टरी में 17 लोगों की मौत, 40 से अधिक घायल

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आंध्र प्रदेश में भीषण विस्फोट: अच्युतपुरम की दवा फैक्टरी में 17 लोगों की मौत, 40 से अधिक घायल

अनकापल्ली, आंध्र प्रदेश:
आंध्र प्रदेश के अनकापल्ली जिले के अच्युतपुरम में स्थित एक दवा बनाने वाली फैक्टरी में बुधवार को हुए भीषण विस्फोट ने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में 17 लोगों की जान चली गई, जबकि 40 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस हादसे ने न केवल मृतकों और घायलों के परिवारों पर बल्कि पूरे राज्य पर गहरा आघात पहुंचाया है। घटना के बाद से ही स्थानीय प्रशासन और राहत बचाव टीमों द्वारा तेजी से कार्यवाही की जा रही है, जबकि राज्य के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस दुखद घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

घटना का विवरण

अनकापल्ली के जिलाधिकारी विजय कृष्णन के अनुसार, अच्युतपुरम स्थित एसेंशिया एडवांस्ड साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड नामक दवा बनाने वाली फैक्टरी में बुधवार की दोपहर लगभग 2:15 बजे अचानक आग लग गई। प्रारंभिक जांच के अनुसार, आग के पीछे बिजली से संबंधित कारणों का संदेह किया जा रहा है।

इस फैक्टरी में लगभग 381 कर्मचारी कार्यरत हैं, और घटना के समय फैक्टरी में दो शिफ्टों में कर्मचारी काम कर रहे थे। सौभाग्य से, विस्फोट लंच के समय हुआ, जिससे फैक्टरी में कर्मचारियों की उपस्थिति कम थी और बड़ी संख्या में जनहानि टल गई। फिर भी, इस भयावह विस्फोट ने 17 जिंदगियां निगल लीं और 40 से अधिक लोगों को घायल कर दिया।

राहत और बचाव कार्य

घटना की सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग ने तेजी से कार्यवाही की। छह दमकल गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने की कोशिश की। इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन ने तत्काल घायलों को अनकापल्ली और अच्युतपुरम के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज चल रहा है। राहत कार्य में जुटी टीमों ने फैक्टरी में फंसे 13 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की है।

अधिकारियों के मुताबिक, आग पर काबू पाने में कुछ घंटे लगे। घटना के समय फैक्टरी के अंदर काम कर रहे कर्मचारियों की स्थिति बेहद नाजुक थी, लेकिन राहत बचाव कार्यों ने कई जिंदगियों को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू का बयान और कार्रवाई

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने घटना के बारे में जानकारी मिलने पर तुरंत एक उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं ताकि इस तरह की घटनाओं के पीछे के कारणों का पता चल सके और भविष्य में इस तरह की त्रासदियों से बचा जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि घटना में मारे गए लोगों के परिवारों को मुआवजा और सहायता प्रदान की जाएगी, साथ ही घायलों के इलाज के लिए हर संभव मदद दी जाएगी।

मुख्यमंत्री नायडू ने बताया कि वे गुरुवार को अनकापल्ली जिले का दौरा करेंगे, जहां वे फैक्टरी के हादसे में प्रभावित परिवारों से मिलेंगे और स्थिति का जायजा लेंगे। उन्होंने इस हादसे को राज्य के लिए एक बड़ी त्रासदी करार देते हुए इसे गंभीरता से लिया है और सभी संबंधित अधिकारियों को घटना की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं।

फैक्टरी की पृष्ठभूमि

एसेंशिया एडवांस्ड साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड ने अप्रैल 2019 में 200 करोड़ रुपये के निवेश के साथ अपना उत्पादन शुरू किया था। यह फैक्टरी आंध्र प्रदेश इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन (एपीआईआईसी) के बहु-उत्पाद विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में स्थित है, जो 40 एकड़ के विशाल परिसर में फैली हुई है। इस फैक्टरी में मुख्य रूप से दवा निर्माण से संबंधित गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी इसी जिले में साहिती फार्मा की एक इकाई में सॉल्वेंट रिएक्टर में विस्फोट हुआ था, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी और पांच अन्य घायल हो गए थे। ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति चिंता का विषय बन गई है और इस दिशा में राज्य सरकार को अधिक गंभीरता से कदम उठाने की आवश्यकता है।

अच्युतपुरम के लोगों में भय और आक्रोश

इस हादसे के बाद अच्युतपुरम और आसपास के क्षेत्रों में भय और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि फैक्टरी में सुरक्षा के मानकों का पालन नहीं किया जाता, जिससे इस तरह की दुर्घटनाएं होती रहती हैं। लोगों ने राज्य सरकार से सख्त कदम उठाने और फैक्टरी की गतिविधियों पर निगरानी रखने की मांग की है।

स्थानीय निवासी सुनीता देवी ने कहा, "यह हमारे लिए बहुत बड़ा सदमा है। हमें डर है कि यह हादसा हमारे इलाके में बार-बार न हो। हम चाहते हैं कि सरकार इस फैक्टरी की सुरक्षा व्यवस्था की गहन जांच करे और यदि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है, तो इस फैक्टरी को बंद किया जाए।"

आने वाले कदम और चुनौतियाँ

एसेंशिया एडवांस्ड साइंसेज फैक्टरी में हुए इस हादसे ने उद्योगों में सुरक्षा उपायों की कमी को उजागर किया है। राज्य सरकार के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण समय है, जहां उसे न केवल इस घटना की जांच करनी है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के निर्देश पर प्रशासन ने फैक्टरी के सभी दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है, और जल्द ही एक रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी। इस बीच, प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

इस हादसे से यह स्पष्ट हो गया है कि उद्योगों में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीरता बरतने की आवश्यकता है। यदि समय रहते सही कदम नहीं उठाए गए, तो इस तरह के हादसे भविष्य में भी होते रहेंगे, जो न केवल जिंदगियों को खतरे में डालेंगे बल्कि राज्य के औद्योगिक विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि राज्य सरकार और उद्योगों के प्रबंधन इस दिशा में मिलकर काम करें, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और राज्य का औद्योगिक विकास सुरक्षित और स्थायी तरीके से आगे बढ़ सके।

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