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शेख हसीना ने छोड़ा देश, प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा: बंग्लादेश में मचा हड़कंप

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 शेख हसीना ने छोड़ा देश, प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा: बंग्लादेश में मचा हड़कंप

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री Sheikh Hasina ने तोड़फोड़ करने वालों से सख्ती बरतने को कहा

ढाका । बांग्लादेश

ढाका, 5 अगस्त 2024 - बांग्लादेश की राजनीति में आज एक बड़ा भूकंप आया जब प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने पद से इस्तीफा देकर देश छोड़ दिया। उनकी इस अचानक और अप्रत्याशित कार्रवाई से पूरे देश में हड़कंप मच गया है। इस्तीफे और देश छोड़ने के बाद लोगों में गुस्सा फूट पड़ा और ढाका स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं।

शेख हसीना का इस्तीफा और देश छोड़ना

शेख हसीना, जिन्होंने बांग्लादेश की राजनीति में चार दशकों तक एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, ने अचानक अपने पद से इस्तीफा देने और देश छोड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने इस्तीफे में व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों का हवाला दिया, लेकिन  उनके इस निर्णय के पीछे के असली कारणों का अभी तक खुलासा नहीं हो सका है।

इस्तीफे के कारणों पर सवाल

शेख हसीना के इस्तीफे और देश छोड़ने के पीछे कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शेख हसीना पर भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों का दबाव था, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया। वहीं, कुछ अन्य का कहना है कि वे अपने जीवन और परिवार की सुरक्षा के कारण मजबूर होकर देश छोड़ने को विवश हुईं।

जनता का गुस्सा और पीएम कार्यालय में तोड़फोड़

शेख हसीना के इस्तीफे और देश छोड़ने की खबर फैलते ही ढाका और अन्य प्रमुख शहरों में लोगों का उतर आए और सरकार विरोधी नारे लगाए। ढाका स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ जमा हो गई और गुस्साई भीड़ ने कार्यालय में तोड़फोड़ की। पुलिस को स्थिति को काबू में करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागने पड़े।

राजनीतिक परिदृश्य पर असर

शेख हसीना के इस्तीफे और देश छोड़ने का बांग्लादेश की राजनीति पर गहरा असर पड़ना तय है। अवामी लीग, जो उनकी पार्टी है, अब एक गंभीर संकट का सामना कर रही है। पार्टी को न केवल नए नेता की तलाश करनी होगी बल्कि जनता के गुस्से और विश्वासघात की भावना को भी संभालना होगा।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया

शेख हसीना के इस्तीफे और देश छोड़ने की घटना पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी आई है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर चिंता जताते हुए कहा, "शेख हसीना का इस्तीफा और देश छोड़ना बांग्लादेश की राजनीति के लिए एक बड़ा धक्का है। हम उम्मीद करते हैं कि बांग्लादेश जल्द ही इस संकट से उबर जाएगा।" वहीं, अमेरिका और यूरोपीय संघ ने भी शेख हसीना की सुरक्षा और बांग्लादेश में स्थिरता की आवश्यकता पर जोर दिया है।

अवामी लीग की चुनौतियाँ

शेख हसीना के इस्तीफे के बाद अवामी लीग के सामने सबसे बड़ी चुनौती नया नेता चुनने की है, जो पार्टी को एकजुट रख सके और जनता का विश्वास पुनः प्राप्त कर सके। पार्टी के वरिष्ठ नेता अब एक आपात बैठक कर रहे हैं, जिसमें नए नेता के चयन पर विचार किया जा रहा है। संभावित नेताओं में पूर्व वित्त  मंत्री, शिक्षा मंत्री, और अन्य वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं।

जनता की प्रतिक्रिया

बांग्लादेश की जनता में इस घटना को लेकर गहरी निराशा और असंतोष है। ढाका के निवासी अब्दुल करीम ने कहा, "हमने शेख हसीना पर विश्वास किया था, लेकिन उनका इस तरह देश छोड़कर जाना हमारे लिए विश्वासघात है।" वहीं, रफीकुल इस्लाम, एक छात्र, ने कहा, "हमारे देश को अब स्थिरता और मजबूत नेतृत्व की जरूरत है। हमें उम्मीद है कि अवामी लीग जल्दी से सही निर्णय लेगी।"

शेख हसीना का राजनीतिक सफर

शेख हसीना का राजनीतिक सफर अत्यंत प्रभावशाली रहा है। 1996 में पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद, उन्होंने बांग्लादेश को आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से मजबूत बनाने के लिए अनेक कदम उठाए। उनके कार्यकाल में शिक्षा, स्वास्थ्य, और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार हुए।

भविष्य की राजनीति

शेख हसीना के इस्तीफे और देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश की राजनीति किस दिशा में जाएगी, यह देखने वाली बात होगी। विपक्षी पार्टियाँ इस अवसर का लाभ उठाकर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं। वहीं, अवामी लीग को अपने अस्तित्व और सत्ता को बनाए रखने के लिए गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

शेख हसीना का इस्तीफा और देश छोड़ने का निर्णय बांग्लादेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। उनके द्वारा किए गए विकास कार्य और सुधार भले ही उनके पद छोड़ने के बाद भी याद रखे जाएंगे, लेकिन इस घटना ने देश में एक बड़ा राजनीतिक संकट उत्पन्न कर दिया है। अवामी लीग के सामने अब एक बड़ी जिम्मेदारी है कि वह जनता का विश्वास पुनः प्राप्त करे और देश को स्थिरता की ओर ले जाए।

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